फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: चिकित्सकों के अभाव में भटक रहा इलाज

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी और पीएचसी तक, कहीं भी स्वीकृति के सापेक्ष विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। ट्राॅमा विंग, क्रिटिकल केयर यूनिट के भवन ळरह बनकर तैयार हैं, पर स्टाफ के अभाव में धूल फांक रहे हैं। हाल में शासन ने क्रिटिकल केयर के लिए दो ईएमओ तैनात किए हैं। वह ज्वॉइन करने आयेंगे या नहीं, यह तय नहीं है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि 80 स्वास्थ्य केंद्रों में से 56 पर स्वीकृति के सापेक्ष तैनाती नहीं हैं।
विज्ञापन

सीएचसी पर एक फिजिशिन, डेंटिस्ट, नेत्र रोग विशेषज्ञ, गायनेकोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट की तैनाती जरूरी है। स्टाफ नर्स, एएनएम, सहायक आदि के पद स्वीकृत हैं, लेकिन 260 के सापेक्ष 162 की ही तैनाती है। पिछले वर्ष संविदा पर भर्ती किए गए 16 एमओआईसी ने एक साथ इस्तीफा दे दिया था। इस वर्ष भी 35 की भर्ती हुई है, पर एक चौथाई ने अभी पदभार नहीं संभाला है। तीन सौ बेड अस्पताल का आठ वर्ष बाद भी पूरी क्षमता के साथ संचालन नहीं हो सका। यहां 33 वेंटिलेटर समेत करोड़ाें के उपकरण धूल फांक रहे हैं। जिले में बनाए गए चार सौ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में से 370 ही संचालित हो रहे हैं। बाकी के लिए स्टाफ और उपकरणों की व्यवस्था नहीं हो सकी।


ट्राॅमा विंग में न उपकरण और न ही विशेषज्ञ चिकित्सक

जिला अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट की तर्ज पर ट्राॅमा विंग का निर्माण हुए दो साल बीत चुका है। हस्तांतरण की कवायद भी पूरी हो चुकी है, पर मानव संसाधन के अभाव में अब तक इसका संचालन नहीं हो सका। यहां जांच संबंधी उपकरण भी नहीं लग सके हैं। जिला अस्पताल में मिनी आईसीयू भी शुरू नहीं हो सका है। ब्यूरो
विज्ञापन






जहां आबादी बढ़ी है, वहां स्वास्थ्य उपकेंद्र निर्माण के लिए जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा। चिकित्सक और स्टाफ के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा जा रहा है। सीमित संसाधन में बेहतर सेवाएं देने का प्रयास है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें