चुनौतियां भी आईं सामने
घर की महिलाएं और खुद सीमा भी घर से ज्यादा बाहर नहीं निकलती थीं। इस वजह से शुरूआत में तैयार मसालों को बाजार में बेचना चुनौतीपूर्ण था। पहले काफी झिझक लगती, फिर तय किया की काम करना है तो बाहर जाना पड़ेगा। घर की महिलाओं को भी बाहर जाने के लिए मनाया। सीमा ने अन्य महिला कारोबारियों से बात-चीत करना शुरू किया। काम करने का तरीका सीखा। करीब डेढ़ साल का वक्त लगा और तस्वीर बदल गई। आज परिवार की महिलाओं के अलावा आस-पास के क्षेत्र की करीब 20 महिलाएं सीमा के साथ जुड़ी हैं।
काम बढ़ा तो मुनाफा भी
सीमा बताती हैं कि खर्च निकालने के बाद महिलाएं सात से आठ हजार रुपये महीना कमा लेती हैं। सबको देने के बाद उन्हें भी अच्छी बचत हो जाती है। उनका कहना है कि धीरे-धीरे जैसे काम आगे बढ़ा है तो मुनाफा भी बढ़ा है। मेहनत लगती है पर मसालों के रंग में जब सफलता दिखती है तो अच्छा लगता है। महिलाएं भी खुशी से सहयोग करती हैं। आज की सफलता उनकी ही मेहनत का नतीजा है। जल्द ही तेल और दाल मिल शुरू करने का मन बनाया है।