बरेली। पिछले साल नवंबर में जहां महामारी की शुरुआत हुई थी वहीं अब सितंबर के आखिरी हफ्ते से इसका कहर कम होने की उम्मीद ज्योतिषाचार्यों ने जताई है। उनके मुताबिक गुरु और केतु की युति से महामारी फैलने की आशंका थी, अब चार दिन बाद केतु के राशि परिवर्तन के साथ गुरु मार्गी हो रहे हैं। हालांकि शनि के साथ एक ही राशि में विराजित होने से संक्रमण से मुक्ति मिलने की गति धीमी रहेगी मगर स्थितियों में सुधार होगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक सितंबर में राहु और केतु का राशि परिवर्तन होगा तो दूसरी ओर शनि और गुरु जो अभी वक्री हैं, वे मार्गी होंगे और देशकाल और परिस्थितियों को परिवर्तित करेंगे। इसका सीधा असर कोरोना संक्रमण पर भी दिखाई देगा। 23 सितंबर को राहु और केतु राशि परिवर्तन कर रहे हैं। राहु, मिथुन राशि से वृष में और केतु धनु से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। राहु और केतु के एक साथ न होने से उनका प्रभाव कम होगा जो महामारी से राहत दिलाएगा। 4 नवंबर 2019 को केतु धनु राशि में थे और इसी दिन गुरु ने वृश्चिक से धनु राशि में प्रवेश किया था। गुरु और केतु की युति से महामारी की आशंका थी। अब 23 सितंबर को केतु राशि परिवर्तन करेंगे। 20 नवंबर से गुरु मार्गी होकर अपनी नीच राशि मकर में प्रवेश करेंगे जहां शनि पहले से हैं। शनि और गुरु के साथ होने से संक्रमण से मुक्ति मिलने में समय लगेगा लेकिन सुधार होगा।
दो ग्रह वक्री होने से बढ़ती है बीमारियां
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक गुरु और शनि का साथ हमेशा कष्टकारक होता है। एक साथ इनके वक्री होने से बीमारी बढ़ती हैं। 11 मई और 14 मई को क्रमश: शनि और गुरु वक्री हुए थे और मई से कोरोना के मामले बढ़े। अब गुरु 13 सितंबर को मार्गी हो चुके हैं। शनि 29 सितंबर से मार्गी हो जाएंगे जो राहत की वजह बनेंगे। शनि जब मार्गी से वक्री और वक्री से मार्गी होता है तो राशियों प्रभावित होती हैं।
शनि के मार्गी होने का यह होगा प्रभाव
मेष: शनि दशम भाव में, नौकरी में तरक्की और सम्मान में वृद्धि, खर्चों में कमी।
वृष: नवम भाव में, यात्रा के साथ परिजनों या मित्रों से दुश्मनी की आशंका है।
मिथुन: अष्टम भाव में, आर्थिक तंगी, परिवार से मनमुटाव, ससुराल से लाभ।
कर्क: सप्तम भाव में, मांगलिक कार्य, व्यक्तित्व में भी गंभीरता आने के संकेत।
सिंह: छठे भाव में, खर्च बढ़ेंगे, शत्रु से छुटकारा, कोर्ट केस में जीत की उम्मीद।
कन्या: पंचम भाव में, लाभ फल में कमी, संतान पक्ष और प्रेम संबंधों में सुधार।
तुला: चतुर्थ भाव में, माता-पिता का सहयोग, किसी रोग से ग्रसित होने की आशंका।
वृश्चिक: तीसरे भाव में, पराक्रम में वृद्धि, भाई-बहनों और मित्रों से बेहतर संबंध।
धनु: दूसरे भाव में, आर्थिक तंगी, परिवारिक सामंजस्य बढ़ेगा, ससुराल से परेशानी।
मकर: पहले भाव में, स्वास्थ्य लाभ, पारिवारिक सुख, बिजनेस पार्टनर से अनबन।
कुंभ: बारहवें भाव में, खर्चों में वृद्धि, शत्रु पक्ष हावी होने, कोर्ट केस में सफलता।
मीन: ग्यारहवें भाव में, व्यापार में बढ़त, नौकरी में भी लाभ की प्राप्ति हो सकती है।