बाघ घर से करीब सौ मीटर की दूरी पर खेत में बने एक नाले पर बैठा रहा। टाइगर रिजर्व प्रशासन ने मुख्यालय से बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति लेकर पौने पांच बजे अभियान शुरू किया। आधे घंटे बाद ट्रैंक्युलाइजर गन से दो डॉट चलाई गईं, लेकिन दोनों निशाने पर नहीं लगीं।
इसके बाद डॉ. एसके राठौर ने गन से डॉट चलाईं जो बाघ को सीधे लगीं और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। वनकर्मी बाघ को स्ट्रेचर पर लादने पहुंचे तो बाघ फिर हिंसक हो उठा। उस पर ट्रैंक्युलाइजर गन से एक और डॉट चलाई गई। इसके बाद वनकर्मियों ने उसे पिंजरे में बंद किया। बेहोश बाघ की हालत देख अफसरों के हाथ-पैर फूल गए।
वनकर्मियों ने बाघ के सीने में पंपिंग की। जानकारों के मुताबिक बाघ बीमार लग रहा था। पिंजरे में कैद बाघ को सुरक्षा के साथ गढ़ा रेंज ले जाया गया और फिर वहां इलाज शुरू किया गया। टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल का कहना है कि बेहोश बाघ के तीन घाव थे और उनमें कीड़े पड़े थे। घाव की साफ सफाई करते वक्त ही उसने दम तोड़ दिया।
साथ ही उन्होंने कहा कि उसकी उम्र करीब दस वर्ष थी। वहीं तीन डॉट दिए जाने यानी नशा ज्यादा होना भी मौत की वजह बताया जा रहा है। आईवीआरआई (बरेली) के डॉ. अभिजीत पावड़े का कहना है कि इसकी सच्चाई पोस्टमार्टम से ही पता चल सकेगी।
माला रेंज की गढ़ा वीट क्षेत्र में शुक्रवार को फिर बाघ देखा गया। किसी घटना की आशंका के चलते उच्चाधिकारियों से बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति मांगी गई। फिर उसे शाम तक ट्रैंक्युलाइज कर लिया गया। बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व