प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में बुलेट ट्रेन चलाने का सपना देख रहे हैं। उनकी मंशा सुपरफास्ट ट्रेनों को भी कम से कम 150 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड पर चलाने की है लेकिन यहां तो जंक्शन की पटरियां ही बूढ़ी और बीमार हैं। उनसे 10 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की स्पीड पर ट्रेनों को गुजारना ही मुमकिन नहीं है। ये हालात तब हैं जब यहां का जंक्शन ‘ए’ श्रेणी में है। रोजाना सौ से ज्यादा ट्रेनों का दबाव झेलने वाली बरेली जंक्शन के प्लेटफार्म की पटरियों की मियाद सालों पहले पूरी हो चुकी है। इंजीनियरिंग विभाग अपनी रिपोर्ट में जंक्शन के तीन प्लेटफार्मों की रेल पटरियों को अनफिट भी घोषित कर चुका है। इसके बावजूद इन पर गति प्रतिबंध के सहारे ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इस दौरान हजारों जिंदगियां जोखिम में रहती है। प्लेटफार्म की रेल लाइनों में खराबी सामने आने के बाद उन्हें बदलने के बजाय अस्थाई मरम्मत के जरिये काम चलाया जा रहा है।
प्लेटफार्म नंबर-एक की लाइन आखिरी बार 1990 में बदली गई थी। इंजीनियरिंग विभाग के मुताबिक रेल लाइन की मियाद दस साल मानी जाती है। इस लिहाज से यह लाइन कई साल पहले ही अपनी उम्र पूरी कर चुकी है। प्लेटफार्म और रेल लाइन के बीच लकड़ी का सपोर्ट देकर ट्रैैक को ट्रेनों का बोझ संभालने लायक बनाने की कोशिश की जा रही है। कई जगह तो पेंड्रोल क्लिप ही गायब हैं। इंजीनियरिंग विभाग के मुताबिक प्लेटफार्म नंबर-दो पर भी वर्ष 2000 के बाद से पटरी बदलने का काम नहीं हुआ है। प्लेटफार्म नंबर-चार की पटरी तो 1970 के बाद से नहीं बदली गई है। हालांकि हाल ही में आंशिक मरम्मत कराई गई थी, लेकिन फिर भी इसे ट्रेनों के संचालन के लिए ठीक नहीं माना जा रहा है। पीडब्ल्यूआई इन तीनों ही प्लेटफार्मों की लाइन के अनफिट होने की रिपोर्ट मंडल मुख्यालय भेज चुके हैं।
दस किमी प्रति घंटे के कॉशन पर गुजरती हैं गाड़ियां
पीडब्ल्यूआई विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रेनों को सुरक्षित निकालने के लिए प्लेटफार्म नंबर दो पर पांच साल से दस किमी प्रति घंटा की गति का कॉशन लगा हुआ है। प्लेटफार्म नंबर एक के ट्रैैक का भी यही हाल है। अधिकारी दबी जुबान यह स्वीकारते भी हैं कि अगर इन बूढ़े अनफिट ट्रैकों से ट्रेन अधिक गति से दौड़ा दी जाए तो वह बेपटरी हो सकती है।
दो साल से ठेकेदार नहीं डाल रहे टेंडर
रेल सूत्रों के मुताबिक रेल पटरी की उम्र पूरी होने के बाद उसे बदलने की कोशिशें तो हुईं लेकिन किसी न किसी वजह से काम शुरू नहीं हो सका। दो साल से तो रेल पटरी बिछाने के लिए कोई ठेकेदार ही सामने नहीं आ रहा है। इंजीनियरिंग विभाग इसके पीछे जो वजह बता रहा है, उसके अनुसार यहां प्लेटफार्म एक और दो के बीच रनथ्रू लाइन है। लिहाजा यहां निर्माण कार्य अन्य प्लेटफार्मों के मुकाबले थोड़ा मुश्किल है, यही वजह है कि ठेकेदार टेंडर नहीं डाल रहे हैं।
किस प्लेटफार्म पर अंतिम बार कब बिछाई गईं पटरियां
प्लेटफार्म नंबर-एक 1990
प्लेटफार्म नंबर-दो 2000
प्लेटफार्म नंबर-चार 1970
जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक, दो और चार के ट्रैक अनफिट होने की रिपोर्ट भेजने के साथ ही नई पटरी बिछाने के लिए कहा जा चुका है। तीनों प्लेटफार्म की लाइनें ट्रेनों के संचालन के लिए सुरक्षित नहीं मानी जा सकती हैं। कॉशन के सहारे काम चलाया जा रहा है।
- विनय कुमार, पीडब्ल्यूआई, बरेली जंक्शन