बरेली। रेलवे ट्रेन दुर्घटनाएं रोकने के लिए ट्रेनों को स्वदेशी टक्कर रोधी प्रणाली से लैस करेगा। बरेली से गुजरने वाली ट्रेनें भी इससे लैस होंगी। इससे ट्रेनों के टकराने का खतरा खत्म हो जाएगा। इस प्रणाली को 2022 में विकसित कर लिया गया था। जून 2023 में शालीमार और बंगलूरू एक्सप्रेस में टक्कर के बाद रेलवे ने सभी ट्रेनों को इस प्रणाली से लैस करने का निर्णय किया है। इस पर काम शुरू हो गया है।
अधिकारियों के अनुसार शुरुआत में फास्ट, सुपरफास्ट ट्रेनों को इस प्रणाली से लैस किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के तहत ट्रेनों को स्वदेशी टक्कर रोधी प्रणाली से लैस करने के रेलवे के प्रयासों की सराहना की है। ये याचिका ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों को लेकर दाखिल की गई थी। पीठ ने 15 अप्रैल को इसका निपटारा करते हुए कहा है कि सुरक्षा और संरक्षा को लेकर रेलवे और सरकार पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं।
इस क्रम में बरेली से गुजरने वाली ट्रेनों को भी स्वदेशी प्रणाली से लैस करने का काम शुरू कर दिया गया है। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि कवच प्रणाली को अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) ने विकसित किया है।
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इस तरह काम करती है
स्वदेशी टक्कर रोधी प्रणाली कवच एक स्वचालित रेल सुरक्षा प्रणाली है। रेलवे के अनुसार यह प्रभावी सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 प्रमाणित तकनीक है। इस कवच का उद्देश्य ट्रेनों की टक्कर को रोकना है। यदि रेलगाड़ी की गति निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है और लोको पायलट इसे नियंत्रित करने में विफल रहता है, तब यह प्रणाली स्वचालित रूप से ट्रेन के ब्रेकिंग तंत्र को सक्रिय कर देती है। यह प्रणाली परिचालन, सुरक्षा, सुविधा से लैस दो ट्रेनों के बीच टकराव को प्रभावी ढंग से रोकती है। इससे यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा बेहतर होगी।