बरेली। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत लॉटरी में नाम आने के बाद भी बच्चों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। विभाग के नोटिस के बाद विद्यालय की ओर से अभिभावकों की आय अधिक होने का तर्क दिया जा रहा है।
आरटीई के दूसरे चरण के तहत एसआर इंटरनेशनल स्कूल को पांच बच्चों को प्रवेश देना था। बीएसए कार्यालय से निर्देश मिलने पर दो बच्चों को प्रवेश दिया गया। निदेशक डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि संबंधित अभिभावकों की आय अधिक होने की वजह से प्रवेश नहीं दिया गया। कुछ अभिभावकों की अपनी दुकान हैं तो कुछ दो-तीन मंजिला घरों में रहते हैं। ये आरटीई के दायरे में नहीं आते हैं। बीते वर्ष भी पांच बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश दिया गया था। जांच कराने पर पता चला कि वे भी आर्थिक रूप से कमजोर नहीं हैं। हालांकि, सत्र शुुरू हो चुका था, इसलिए उन्हें निकाला नहीं गया। बीएसए कार्यालय से प्राप्त नोटिस का जवाब कमिश्नर, डीएम और बीएसए को भेजा गया है। अभिभावक के रुपये भी वापस कर दिए गए हैं।
विद्यालय में प्रवेश नहीं देेने पर अभिभावक ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की है। इसमें आरोप लगाया है कि विद्यालय ने प्रवेश की औपचारिकताएं पूरी कराकर एक हजार रुपये जमा कराए। फॉर्म पूरा कर विद्यालय पहुंचे तो टालमटोल की जा रही है। विद्यालय के प्रबंधक को बिथरी चैनपुर के खंड शिक्षा अधिकारी ने 10 अप्रैल को पत्र भेजकर 14 अप्रैल तक प्रवेश देने के लिए कहा था। इसके बाद 15 अप्रैल को बीएसए ने विद्यालय को पत्र भेजा था। इसमें छात्र को प्रवेश न देने पर कार्रवाई करने की बात लिखी है।
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेश न देने की शिकायत प्राप्त हुई थी। विद्यालय को नोटिस जारी किया गया है। जवाब प्राप्त होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - संजय सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी