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लोको पायलट समेत तीन के ब्लड सैंपल लिए गए

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पीलीभीत। टनकपुर रूट पर बुधवार को पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस उल्टी दौड़ने के मामले को रेलवे अफसरों ने बेहद गंभीरता से लिया है। इस घटना के बाद बुधवार को ही लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड को निलंबित कर दिया गया था। रेल अफसरों को तीनों कर्मचारियों के नशे में होने का शक है, जिसकी जांच के लिए उनका ब्लड सैंपल लिया गया है। जांच टीम ने करीब तीन घंटे तक मौजूद रहकर गहनता से छानबीन की और कर्मचारियों से पूछताछ की।
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पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस से बुधवार को टनकपुर में सिगनल होम के पास एक जानवर टकरा गया था। बताते हैं कि जानवर के टकराने से इंजन में तकनीकी खराबी आने कारण ब्रेक नहीं लगे और ट्रेन बेकाबू होकर 22 किलोमीटर तक उल्टी दौड़ती चली गई। इसके बाद रेल कर्मचारियों ने किसी तरह ट्रेन को रोका था। इसकी सूचना मिलने के बाद पीलीभीत से पहुंचे दूसरे इंजन से ट्रेन को खटीमा स्टेशन ले जाया गया।
इस हादसे की सूचना कंट्रोल रूम से मिलते ही इज्जतनगर रेल मंडल से तीन सदस्यीय टीम जांच को मौके पर भेज दी गई थी। यह टीम बुधवार शाम साढ़े सात बजे घटनास्थल पर जा पहुंची। टीम ने करीब तीन घंटे तक मौके पर रहकर गहनता से पड़ताल की। ड्यूटी पर तैनात कर्मियों से गहनता से पूछताछ की गई। शुरूआती जांच में लोको पायलट मुबारक अंसारी, सहायक लोको पायलट जितेंद्र कुमार और गार्ड आरसी प्रसाद को दोषी मानकर निलंबित कर दिया था। स्वास्थ्य टीम को बुलाकर तीनों कर्मचारियों के ब्लड सैंपल लिए गए। अल्कोहल की पुष्टि के लिए सैंपल जांच को भेजे गए हैं। जांच इज्जतनगर मंडल कार्यालय स्थित लैब में होगी।
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पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस का खराब डीजल इंजन खटीमा स्टेशन यार्ड में खड़ा कर दिया गया है। दूसरे डीजल इंजन से ट्रेन को करीब सवा नौ बजे टनकपुर के लिए रवाना किया गया। जांच टीम में मुख्य रूप से चीफ सेफ्टी ऑफीसर, सीनियर डीईएन, सीनियर डीएमई शामिल हैं। इज्जतनगर रेल मंडल के पीआरओ राजेंद्र सिंह ने बताया कि जांच टीम रात में ही मौके पर भेज दी गई थी। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
दस्तावेजों में नहीं है ढलान का जिक्र
रेल सूत्रों के मुताबिक टनकपुर स्टेशन के होम सिगनल तक एक हजार फिट में एक फिट का ढलान है। जबकि होम सिगनल के बाहर इससे ज्यादा ढलान है। इस ढलान का जिक्र रेलवे के दस्तावेजों में नहीं है। इसी वजह से टनकपुर स्टेशन पर ट्रेन खड़ी होने पर जंजीर से बंधाने के संसाधन नहीं हैं। जबकि नियमानुसार ढलान वाले स्टेशनों पर ट्रेन को जंजीर से बंधाने की सुविधा होनी चाहिए।
चार साल पहले भी हुई थी इस तरह की घटना
आमान परिवर्तन के दौरान 2017 में टनकपुर स्टेशन पर एक मालगाड़ी में जेसीबी से पत्थरों की लोडिंग हो रही थी। उस वक्त मालगाड़ी में इंजन नहीं लगा था। मालगाड़ी में पत्थरों की लोडिंग करते समय जेसीबी से धक्का लग गया। ढलान होने के कारण मालगाड़ी दौड़ने लगी। काफी प्रयास के बाद मालगाड़ी नहीं रुकी। खटीमा स्टेशन पर ट्रैक में अवरोधक बनाकर मालगाड़ी को रोका गया। उस समय ट्रैक पर आमान परिवर्तन का काम चल रहा था। इससे यह मामला रेल अधिकारियों ने ठंडे बस्ते में डाल दिया।
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