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खेल-खेल में बच्चे बंद कर देते हैं जंक्शन का एस्केलेटर

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खेल-खेल में बच्चे बंद कर देते हैं जंक्शन का एस्केलेटर - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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कभी शुरू-कभी बंद देखकर यात्री समझते हैं ट्रायल चल रहा है
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मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने पर लगेगी आरपीएफ की ड्यूटी
बरेली। बरेली जंक्शन का एस्केलेटर मजाक बनकर रह गया है। अब जंक्शन पर रात में घुमंतु बच्चे एस्केलेटर का स्टॉप का बटन दबा देते हैं, जिससे एस्केलेटर रुक जाता है, जबकि रोज आने-जाने वाले यात्री यही समझते हैं कि अभी एस्केलेटर का ट्रायल चल रहा है। मामला स्थानीय अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद अब एस्केलेटर पर आरपीएफ की ड्यूटी लगाई जाएगी, जो ऐसे बच्चों पर नजर रखेगी।
दो साल से कबाड़ की तरह पड़े रहे एस्केलेटर को एक साल पहले लगाने की शुरुआत हुई। पिछले साल 28 नवंबर को उत्तर रेलवे के जीएम टीपी सिंह के निरीक्षण के दौरान एस्केलेटर को शुरू किया जाना था, लेकिन उस समय ट्रायल होने के कारण उन्होंने एस्केलेटर का उद्घाटन नहीं किया। अब ट्रायल खत्म होने के बाद एजेंसी ने रेलवे को एस्केलेटर सौंप दिया है।
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एस्केलेटर चलने भी लगे हैं, लेकिन जंक्शन पर घूमने वाले घुमंतु बच्चे एस्केलेटर को चलने नहीं दे रहे। वह रात में खेल-खेल में एस्केलेटर का बटन दबा देते हैं, जिससे चलता हुआ एस्केलेटर रुक जाता है और यात्रियों को सीढ़ियों से प्लेटफार्म दो पर जाना पड़ता है। शुरू में एक-दो यात्री स्टेशन अधीक्षक सत्यवीर सिंह के पास गए तो उन्हें ट्रायल होने का पता चला, इसके बाद उन्होंने जाना ही छोड़ दिया। यात्री भी समझते हैं कि अभी ट्रायल ही चल रहा है। यह बात स्थानीय अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने आरपीएफ को ऐसे बच्चों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
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गौरतलब है कि रेलवे ने बुजुर्ग और महिलाओं की सुविधा के लिए 2017 में एस्केलेटर लगाने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक ऐसे यात्रियों को एस्केलेटर की सुविधा नहीं मिल सकी है। जंक्शन के स्टेशन अधीक्षक सत्यवीर सिंह का कहना है कि आरपीएफ इंस्पेक्टर को इसकी जानकारी दी गई है। उन्होंने यहां किसी की ड्यूटी लगाने की बात कही है।
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