बरेली। हावड़ा-हरिद्वार कुंभ एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे सुल्तानपुर के यासीन कुरैशी अपने स्टेशन पर उतरे तो जल्दबाजी में देहरादून के विकास सिंह का बैग उठा तो ले गए लेकिन घर पहुंचने के बाद जब उन्हें एहसास हुआ कि बैग बदल गया है तो उन्होंने उसे खोलकर भी नहीं देखा। इधर, बरेली में आरपीएफ की चेकिंग के दौरान विकास को पता लगा कि कोई उनका बैग ले गया है तो उनकी सांसें चढ़ने लगीं। ट्रेन में छूटे यासीन के बैग में मिले आधार कार्ड के जरिये आरपीएफ ने उनका फोन नंबर ट्रेस कर उनसे बात की तो यासीन मंगलवार को बरेली पहुंचे और विकास को उनका बैग वापस कर दिया।
देहरादून में एक निजी कंपनी में कार्यरत विकास सिंह सोमवार को परिवार के साथ हावड़ा-हरिद्वार कुंभ एक्सप्रेस से हरिद्वार लौट रहे थे। इसी कोच में सुल्तानपुर के यासीन कुरैशी भी सवार थे जो सुल्तानपुर में उतरे तो जल्दबाजी में यह भी नहीं देखा कि वह विकास सिंह का बैग ले जा रहे हैं। ट्रेन के बरेली जंक्शन पहुंचने के बाद यहां जब आरपीएफ इंस्पेक्टर विपिन सिसौदिया ने सब इंस्पेक्टर ज्योति सिंह और कांस्टेबल मनोज कुमार के साथ कोच में अंदर आकर यात्रियों का सामान चेक करना शुरू किया तो एक लावारिस बैग पाए जाने के पूछताछ शुरू की। इसी दौरान विकास सिंह को अपने बैग का ख्याल आया, सीट के नीचे देखा तो उनका बैग गायब था। तब पता चला कि उनका बैग किसी और यात्री के बैग से बदल गया है।
आरपीएफ को जब माजरा पता लगा तो उसने विकास के सामने ही लावारिस पाए गए बैग को खोलकर उसकी तलाशी ली। इस बैग में यासीन कुरैशी का आधार कार्ड मिला तो उसका नंबर इंटरनेट पर डालकर यासीन कुरैशी का मोबाइल नंबर ट्रेस किया गया। इसके बाद आरपीएफ इंस्पेक्टर ने फोन पर विकास की यासीन से बात कराई। फोन पर बात होते ही यासीन ने मान लिया कि वह धोखे से गलत बैग उठा लाए हैं और मंगलवार को उसे लौटाने बरेली पहुंचेंगे। मंगलवार को यासीन ने बरेली आकर विकास का बैग उनके सुपुर्द कर दिया। यहीं आकर यासीन को पता लगा कि एक शादी से लौट रहे विकास के बैग में सोने का हार था। उन्होंने बताया कि उन्होंने बैग खोला भी नहीं था। विकास आरपीएफ स्टाफ का शुक्रिया अदा कर इसके बाद देहरादून चले गए।