फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: व्यापारियों को मिले राहत, तभी बढ़ेगा कारोबार

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। बजट 2026 को लेकर जिले के प्रमुख उद्योगों में हलचल है। हर वर्ग अपने कारोबार के अनुसार उम्मीद लगाए बैठा है। जिले में एक जिला एक उत्पाद योजना में जरी जरदोजी व बांस के उत्पाद के शामिल है। इसके अलावा यहां पर प्लाईवुड, चावल, लकड़ी फर्नीचर का होने वाला कारोबार प्रमुख है। जिला का बड़ा राजस्व इन उद्योग को मिलता है। यहां का बना माल देशभर के राज्यों में जाता है, लेकिन यहां के हर कारोबारियों को अभी भी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इन उद्योगों में काम करने वाले लाखों कारीगरों और हजारों व्यापारियों की नजरें इस बार वित्तमंत्री के पिटारे पर टिकी हैं। यहां का बना माल देश के लगभग हर राज्य में अपनी पहचान बना चुका है, लेकिन बढ़ती लागत और प्रतिस्पर्धा ने कुछ चुनौतियां भी पेश की हैं।
विज्ञापन


प्लाईवुड उद्योग पर कम हो जीएसटी
- जिले में प्लाईवुड का बड़ा कारोबार होता हैं। यहां पर परसाखेड़ा, रजऊ में कई प्लाईवुड उद्योग की फैक्टरी है। यहां से बना माल राजस्थान, पंजाब, बंगाल, उत्तराखंड, दक्षिण भारत तक समेत अन्य राज्यों में जाता है। प्लाईवुड उद्योग से करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार हर साल होता है। व्यापारी के इस बजट में उम्मीद है कि प्लाईवुड पर सरकार जीएसटी 18 प्रतिशत से कम कर दे तो उद्योग को बड़ी राहत मिलेगी। इसी के साथ प्लाई बनाने के लिए आने वाली पत्तों पर मंडी शुल्क को भी समाप्त किया जाना चाहिए। इससे उद्यमियों को राहत मिलेगी। प्लाई फैक्ट्रियों से जुडे करीब 10 हजार से ज्यादा कर्मचारी भी काम करते है।

जरी जरदोजी के माल को बेचने के लिए बने स्थान
- बरेली में जरी जरदोजी कारोबार का बड़ा हब है। इसे ओडीओपी में शामिल किया गया है, लेकिन कारोबारियों को जरी के बने वस्त्रों को बेचने के लिए दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है। जिले में ऐसा कोई सरकारी स्थान नहीं है जहां पर एक छत के नीचे जरी का सामान बेचा जा सके। जरी का हर साल यहां से करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। 25 हजार कारीगर इस काम से जुडे है। पुराना शहर के कारीगर गड्डू बताते है कि जरी में बहुत बारीक काम होता है, एक साड़ी या सूट कई दिनों में बन पाता है, लेकिन उसके अनुसार उन्हें मेहनताना नहीं मिलता है। बजट में मेहनताने को भी बढ़ाना चाहिए। वहीं कारोबारियों का कहना है कि उनके सामान की बिक्री के लिए नया प्लेटफाॅर्म बनाना चाहिए, जिससे व्यापार करने में आसानी हो सके।
विज्ञापन


ऑनलाइन बांस का सामान बेचने के लिए बने प्लेटफाॅर्म
- बांस बरेली के नाम से पहचान रखने वाले बरेली में बांस की भले ही पैदावार न हो, लेकिन यहां का बांस का बना सामान देशभर में प्रसिद्ध है। सुंदर और आकर्षक दिखने वाले सौफे, कुर्सी, मेज, सजावटी सामान लोगों को खूब पसंद आते है, लेकिन यहां के कारीगरों को उनका मेहनताना नहीं मिल पा रहा है। अगर ऑनलाइन सामान बेचने के लिए कोई स्थान मिल जाए तो कारोबारियों को फायदा होगा और रोजगार भी बढ़ेगा। वहीं जिले में लकड़ी से बनने वाला फर्नीचर देशभर में जाता है। कारोबारी बताते है कि यहां पर सोफा, बेड, टेबल, लकड़ी की अलमारी, मंदिर आदि की खूब बिक्री होती है। कारोबारी अनिल गुप्ता बताते है अगर लकड़ी खरीदारी के दौरान जीएसटी समेत अन्य करों को पर छूट मिलनी चाहिए।

- जिले का प्लाईवुड उद्योग सबसे बड़ा हैं। अगर इस बार बजट में जीएसटी में कारोबारियों को राहत मिलती है तो ये कारोबार के लिहाज से बेहतर कदम साबित होगा। - सलील बंसल, प्लाईवुड कारोबारी
- जरी जरदोजी का सामान बेचने के लिए कारोबारियों के पास कोई भी प्लेटफाॅर्म उपलब्ध नहीं है। अगर सरकार सामान को ऑनलाइन बेचने की व्यवस्था बना दे तो कारोबार में वृद्धि होगी। - सुदीप राजगडियां, जरी कारोबारी

- लकड़ी व बांस के फर्नीचर को बढ़ावा देने के लिए लकड़ी लाने के दौरान लगने वाला मंडी शुल्क व जीएसटी के नियमों में सरलीकरण किया जाना चाहिए। - रिषभ अग्रवाल, फर्नीचर कारोबारी

- इस बार के बजट में उद्यमियों को सरकार से कई उम्मीदें है। सरकार ने कई सेक्टर में जीएसटी को कम किया, लेकिन कई सेक्टर ऐसे है जहां पर और सुधार की आवश्यकता है। - मयूर धीरवानी, चेयरमैन, आईआईए
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें