बरेली। शहर के सात नाथ मंदिरों को सजाने-संवारने का काम बेहद सुस्त है। पर्यटन विभाग प्रस्ताव बनाने में अव्वल है, पर क्रियान्वयन में फिसड्डी साबित हो रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में विभाग की ओर से 75 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया। शासन स्तर से अलग-अलग परियोजनाओं के लिए करीब 25 करोड़ रुपये जारी हुए। वित्त वर्ष 2025-26 में भी शासन से 12 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके बावजूद पर्यटन विभाग वित्त वर्ष 2024-25 के काम ही अब तक पूरे नहीं करा सका है।
नाथ नगरी के सात नाथ मंदिरों का जीर्णोद्धार प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। शासन स्तर से बजट जारी होने के बाद एक साल से मंदिरों को सजाने-संवारने का काम बेहद सुस्त गति से चल रहा हैं। इस वजह से परियोजना परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। आलम यह है कि नाथ मंदिरों में अभी तक लक्ष्य का आधा काम भी पूरा नहीं हुआ हैं। बीते दिनों मंडलीय समीक्षा बैठक में पर्यटन विभाग को कामों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। विभाग ने अब जुलाई 2026 तक काम पूरा करने का दावा किया है।
अलखनाथ मंदिर में विवाद के बाद काम रुक गया था। उसका निस्तारण नहीं हो पाया है। विभाग की ओर से दूसरे पक्ष को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। वनखंडीनाथ मंदिर में काफी समय तक जगह को लेकर विवाद चला। इस वजह से निर्माण कार्य में देरी हुई। नवंबर में वहां काम शुरू हुआ। त्रिवटीनाथ मंदिर में भी करीब 60 फीसदी ही काम हो पाया है। इन मंदिरों में बहुउद्देशीय हॉल, जलापूर्ति, बेंच, फसाड लाइटिंग, शौचालय, विश्रामालय, साइनेज और होर्डिंग जैसे विकास कार्य होने हैं। इनका उद्देश्य जिले में आने वाले पर्यटकों को आरामदायक अनुभव प्रदान करना है।
विभाग की ओर से नाथ मंदिरों में विकास कार्य कराए जा रहे है। जहां भूमि को लेकर विवाद है, उसे सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। जुलाई 2026 तक पुराने काम पूरे हो जाएगे। - रविंद्र कुमार, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी