आंखों में खुशी के आंसू आए जा रहे हैं। मैं समझा नहीं सकता कि कैसे बयां करूं। बचपन में जब अपने घर से ताऊ के साथ पंजाब गया था तो मन में था कि हॉकी में कुछ बड़ा करूंगा। मेरे परिवार के खून में हॉकी है। खुशी है कि आज बरसों पुराना सपना पूरा हुआ।
फोन पर बात करते हुए कांस्य पदक विजेता होने का गौरव भी पीलीभीत के खिलाड़ी सिमरनजीत की आवाज में झलक रहा था। फोन पर हुई बातचीत में कहा कि पूरा भरोसा है कि देश में हॉकी अब फिर से ऊंचाई पर होगी। भारत की जीत में सिमरनजीत सिंह ने दो गोल किए। उन्होंने ही भारत के लिए पहला और पांचवां गोल किया।
सिमरनजीत ने बताया कि टीम ने ओलंपिक पदक के लिए खूब मेहनत की थी। उन्हें खुशी है कि उन्होंने जरूरत पड़ने पर देश के लिए बेहतर खेल दिखाया। वह गांव में लकड़ी की स्टिक से ही खेलने की कोशिश करते थे। उनकी खेल में रुचि देखकर दस साल की उम्र में ही पंजाब निवासी ताऊ उन्हें अपने साथ ले गए।
इसके बाद हॉकी का उनका सफर हुआ। मैच में जब-जब मौका मिला तो पूरी जान लगा दी। खुशी इस बात की है कि वह अहम मौकों पर टीम के काम आए। कोच और कप्तान सहित सभी खिलाड़ियों ने तय किया था कि पूरी जान लगा देंगे।