चमचमाते टॉयलेट का प्रयोग करने के आदी कान्वेंट स्कूलों के बच्चों और शिक्षकों को स्पोर्ट्स स्टेडियम में काफी बुरे हालात से गुजरना पड़ रहा है। स्टेडियम का टॉयलेट इतना गंदा शिक्षक और बच्चे उसमें जाना नहीं चाहते। टॉयलेट न जाना पड़े, इसलिए इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन की स्पोर्ट्स मीट में यहां आए अधिकतर शिक्षकों और बच्चों ने पानी पीना कम कर दिया है। स्पोर्ट्स मीट की कवरेज करने पहुंची अमर उजाला टीम से कुछ बच्चों ने शिकायत की तो हमने स्थिति का जायजा लिया तो हालात वाकई खराब दिखे। कुछ बच्चे लघुशंका के लिए स्टेडियम के पीछे की दीवार का प्रयोग कर रहे थे, इक्का-दुक्का नाक बंद करके टॉयलेट में जाते दिखाई दिए।
गर्ल्स टॉयलेट पर कोई साइन ही नही... फोटो
महिलाओं के शौचालय में पांच केबिन बने हैं। इनमें दो ही खुले मिले जो काफी गंदे थे। एक केबिन में काले रंग की टंकी रखी हुई है, जिसका कोई प्रयोग नहीं है। बाकी दो पर ताला लगा है। वाश बेसिन की टैब भी टूटी है। बच्चों को टॉयलेट प्रयोग करने के बाद अपनी बोतल से ही हाथ धोना पड़ रहा है। शौचालय के बाहर ‘महिला शौचालय’ का कोई साइन भी नहीं लगा है। बैडमिंटन हॉल के टॉयलेट पर भी ताला लगा हुआ है।
ब्वायज टॉयलेट कीचड़ जैसे हालात फोटो
ब्वायज टॉयलेट को शिक्षक और छात्र जैसे-तैसे प्रयोग कर रहे थे। अंदर कीचड़ जैसे हालात देखकर कुछ बच्चे बाहर आ गए। चार यूरिनल में पाइप न होने से गंदगी फैल रही है। चार शौचालय में से तीन गंदे पड़े है। एक में काली टंकी रखी है। दो वॉश बेसिन में एक टूटी पड़ी है, जबकि दूसरे में पानी का पाइप न होने से कीचड़ फै ल रहा है। शौचालय के बाहर कोई साइन भी नहीं बना है।
बच्चे शौचालय प्रयोग करने से बच रहें हैं। कुछ बच्चों ने टॉयलेट साफ करवाने की मांग भी की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हमने निगम से मोबाइल टॉयलेट मांगा था, लेकिन कुछ कारणों से नहीं दिया गया।
- पारुष अरोड़ा, अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
एक बार सुबह सफाई होती है। इसके बाद कर्मचारी स्टेडियम में जुट जाते हैं। 2000 बच्चे हैं, इसलिए बार-बार प्रयोग होने से यह गंदा हो जाता है। एक महिला शिकायत करने आईं भी थीं। हालांकि, मैंने अब तक शौचालय की स्थिति नहीं देखी है।
- लक्ष्मी शंकर सिंह, प्रभारी आरएसओ