शौचालय बनवाकर लोग करीब नौ करोड़ के कर्ज में डूब गए हैं। पंचायतराज विभाग से शौचालय बनवाने की रकम नहीं मिल रही। बजट को लेकर शासन के हाथ तंग होने की बात कहकर अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं। ऐसे में स्वच्छता अभियान से जुड़ने वाले आर्थिकरूप से कमजोर लोग सब्सिडी पाने के लिए भटक रहे हैं।
व्यक्तिगत शौचालय बनवाने के लिए पंचायतराज विभाग प्रत्येक व्यक्ति को 12 हजार रुपये की सब्सिडी देता है। विभाग ने शौचालय निर्माण का टारगेट पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को अनुदान दिलाने का दिलासा तो दे दिया लेकिन शासन ने इसके हिसाब से बजट देने में कंजूसी दिखाई। विभाग की मानें तो शौचालय बनवाने वालों को 42 करोड़ रुपये देने हैं लेकिन शासन से अब तक केवल 33 करोड़ ही मिले हैं। ऐसे में सात से आठ हजार लोगों को शौचालय निर्माण की रकम नहीं दी जा पा रही है।
मार्च में 13 हजार शौचालय बनाने का टारगेट
पंचायतराज विभाग को इस साल 49 हजार व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराना है, जबकि अभी तक यह आंकड़ा केवल 36 हजार का ही बताया जा रहा है। विभाग की इस रिपोर्ट को ही सही मानें तो भी बजट की कमी के बीच मार्च में 13 हजार शौचालय बनवाने का लक्ष्य है।
मिस्त्री और ईंट-सीमेंट वाले कर रहे तगादा
विभाग के आश्वासन पर लोगों ने शौचालय का निर्माण तो शुरू कर दिया लेकिन सब्सिडी न मिलने से उन्हें मिस्त्री और ईंट-सीमेंट सहित अन्य निर्माण सामग्री की रकम जेब से चुकता करनी पड़ रही है। इसमें ज्यादातर गरीब किसान या मजदूर पेशा लोग हैं। उनका दर्द है कि वे इस तरह घर से कब तक पैसा लगाएं। उधार निर्माण सामग्री लेने पर अब दुकानदार भी तगादा करने लगे हैं।
अभी ढाई करोड़ रुपये मिले हैं। यह बजट बेहद कम है। कम से कम दस करोड़ की जरूरत है। इसके लिए शासन से पैरवी की जा रही है। - विनय सिंह, डीपीआरओ