मां दुर्गा की तीसरी शक्ति चंद्रघंटा हैं। तीसरे दिन इन्हीं की पूजा होगी। एक दिन क्षय होने से रविवार को ही मां कुष्मांडा की भी आराधना होगी। शनिवार दूसरे दिन कालीबाड़ी समेत कई मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ रही। भजन कीर्तन का दौर देर शाम तक चलता रहा।
इस बार नवरात्र आठ दिन का होने की वजह से एक दिन क्षय हो गया है। तृतीय और चतुर्थी रविवार में मानी जा रही है। इसलिए तीसरे दिन मां चंद्रघंटा और कुष्मांडा की आराधना की जाएगी। आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि गुलाब, लाल कनेर, कमल मां चंद्रघंटा ज्यादा प्रिय है। ऊनी आसन पर बैठकर इनकी आराधना करनी चाहिए। कुष्मांडा मां दुर्गा की चौथी स्वरूप हैं। इनकी उपासना से परेशानियाें का नाश होता है। सुख, समृद्धि की प्रतीक कुष्मांडा की उपासना रविवार में होगी। इन्हें बेलपत्र, लाल गुलाब, कमल फूल, पसंद है। कुश अथवा ऊनी आसन पर बैठकर आराधना करनी चाहिए। श्री हरे राम ग्वाल बाल भगवती सेवा समिति सुभाषनगर में त्रिलोकी नाथ वार्ष्णेय, भगवान दास वर्मा, मीरा वर्मा, शिखा भटनागर व अन्य ने अर्चना की। महिलाओं ने भजन गाया।