पुलिस इस मामले में मुकेश की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध मान रही थी। पुलिस ने बच्चों के अलग-अलग बयान लेने के बाद उन्हें घटनास्थल पर ले जाकर तस्दीक किया तो वे सटीक जानकारी नहीं दे सके। रितिका और प्रशांत के मोबाइल की लोकेशन भी घटनास्थल से काफी दूर मिली। इसके बाद पुलिस ने मुकेश के मोबाइल की लोकेशन निकलवाई तो घटना वाले दिन उसकी बरेली में ही मौजूदगी सामने आई, जबकि उसने खुद को तिलहर में बताया था। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। सख्ती करने पर उसने सच्चाई बता दी। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया।
कोतवाली इंस्पेक्टर हिमांशु निगम ने बताया कि मुकेश अपनी पत्नी को वापस पाना चाहता था। सोचा कि प्रशांत जेल चला जाएगा तो रितिका उसके पास आ जाएगी। इसके अलावा रितिका जो मकान बेच रही थी, वह भी बच जाएगा। यही सोचकर एक दिसंबर को उसने बच्चों को ट्रेन से किच्छा रवाना किया। जब बच्चे लौटे तो उसने सेटेलाइट पर उन्हें नींद की गोलियां देकर ई-रिक्शा में बैठाकर पुराने रोडवेज बस अड्डे पर भेज दिया, जहां वे बेहोश होने लगे। पुलिस ने फोन किया तो खुद भी वहां पहुंच गया।