डोपिंग से निपटने के लिए एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। बुधवार को हुई डोप टेस्ट कार्यशाला में महाविद्यालय के क्रीड़ा अधिकारियाें को जानकारी दी गई कि इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में खेलने वाले खिलाड़ियों को अब अपनी बायोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही खिलाड़ियों से स्वत: प्रमाण लिया जाएगा। प्रमाण पत्र में किसी प्रकार के ड्रग न लेने की बात कही गई होगी। जांच में कुछ गलत मिला तो खिलाड़ी पर प्रतिबंध लग जाएगा।
रुविवि के क्रीड़ा परिषद की ओर से आयोजित कार्यशाला में नाडा के महानिदेशक नवीन अग्रवाल, प्रोजेक्ट ऑफिसर डॉ. अंकुश गुप्ता और नेशनल ड्रग टेस्टिंग लैब की अलका बत्रा शामिल र्हुइं। इस दौरान बताया गया कि जिन खिलाड़ियों का चयन नार्थ जोन चैंपियनशिप और ऑल इंडिया के लिए होगा उनका अब डोप टेस्ट किया जाएगा। बताया गया कि कॉफी का प्रयोग अब खिलाड़ी अपनी मनमर्जी के मुताबिक कर सकते हैं। इसे डोप टेस्ट से बाहर कर दिया गया है। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन, क्रीड़ा सचिव प्रो. एके जेटली, डॉ. तरुण राष्ट्र, हेम गौतम व अन्य का सहयोग रहा।
खिलाड़ी भी देख सकता है अपनी जांच
प्रोजेक्ट ऑफिसर नाडा डॉ. अंकुश गुप्ता ने बताया कि जिस खिलाड़ी की डोपिंग जांच पॉजिटिव आई है वह अपने दूसरे सैंपल की जांच देख सकता है। दूसरे सैंपल की सील बोतल वह खुद खोलकर लैब में देता है। हालांकि यह केवल संतुष्टि का प्रॉसेस है, दूसरे सैंपल की जांच रिपोर्ट भी पहले सैंपल की तरह ही आती है।