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बरेली: वन विभाग की टीम ने ‘शर्मीली’ को दुधवा के जंगल में छोड़ा, पिंजड़े का दरवाजा खुलते ही लगाई लंबी छलांग और हो गई ओझल

Sun, 20 Jun 2021 12:40 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली की बंद पड़ी रबर फैक्टरी में पिछले करीब सवा साल से वन विभाग को छका रही बाघिन को आखिर शुक्रवार को ट्रैंक्युलाइज करने के बाद पिंजड़े में कैद कर लिया गया था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) की अनुमति के बाद बाघिन को पिंजड़े समेत एक ट्रक से दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में लाया गया।
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वन विभाग की टीम ने बाघिन ‘शर्मीली’ को दुधवा के जंगल में छोड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली की रबर फैक्टरी से टैंक्युलाइज कर लाई गई बाघिन ‘शर्मीली’ को दुधवा के जंगल में शुक्रवार रात छोड़ दिया गया। पिंजड़े का दरवाजा खुलते ही शर्मीली ने एक लंबी छलांग लगाई और देखते ही देखते जंगल में घुसकर आंखों से ओझल हो गई। जंगल में छोड़ने से पहले डॉक्टरों ने शर्मीली का स्वास्थ्य परीक्षण किया और उसे पूरी तरह स्वस्थ पाया।

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बरेली की बंद पड़ी रबर फैक्टरी में पिछले करीब सवा साल से वन विभाग को छका रही बाघिन को आखिर शुक्रवार को ट्रैंक्युलाइज करने के बाद पिंजड़े में कैद कर लिया गया था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) की अनुमति के बाद बाघिन को पिंजड़े समेत एक ट्रक से दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में लाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसका बारीकी से स्वास्थ्य परीक्षण किया। उसके पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद उसे सोनारीपुर रेंज में छोड़ दिया गया।

बता दें कि बाघिन करीब सवा साल पहले किशनपुर सेंक्चुरी से निकलकर बरेली में बंद पड़ी रबर फैक्टरी पहुंच गई थी। अनुकूल प्राकृतवास मिलने पर बाघिन ने रबर फैक्टरी में ही अपना ठिकाना बना लिया। इस बीच बाघिन को ट्रैंक्युलाइज कर वापस किशनपुर सेंक्चुरी लाने की कोशिश की जाती रही। कई विशेषज्ञों के साथ दुधवा टाइगर रिजर्व टीम की मदद ली गई लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई। गुरुवार को यह बाघिन शीरा भरने के खाली टैंक में घुस गई। तब वन विभाग घेराबंदी कर उसे टैंक्युलाइज करने में कामयाब हो पाया।
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बरेली की बंद पड़ी रबर फैक्टरी में सवा साल तक वन विभाग को छकाने वाली बाघिन शर्मीली को ट्रैंक्युलाइज कर दुधवा लाया गया था। जिसे स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दुधवा के जंगल में छोड़ दिया गया है। - संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व

पहले किशनपुर सेंक्चुरी में ही बाघिन को छोड़ने की योजना थी, क्योंकि वह वहीं से फैक्टरी तक पहुंची थी लेकिन सेंक्चुरी ले जाने में काफी दिक्कतें आ रही थीं, इसलिए विशेषज्ञों की राय पर उसे दुधवा में छोड़ा गया है। - ललित वर्मा, मुख्य वन संरक्षक, बरेली

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