लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क के किशनपुर अभयारण्य से 11 मार्च 2020 को निकलकर बरेली की बंद पड़ी रबर फैक्टरी में पहुंच गई बाघिन शर्मिली को आखिरकार 15 महीने बाद पकड़ लिया गया। उसे छठी बार शुरू किए गए बचाव अभियान के अंतर्गत 30 घंटे तक चले बड़ा बचाव अभियान के दौरान शुक्रवार सुबह 11 बजे पकड़ा गया। अब उसे फिर से किशनपुर अभयारण्य भेज दिया जाएगा।
बरेली के मुख्य वन संरक्षक ललित वर्मा ने बताया कि चार साल की बाघिन 'शर्मीली' बहुत चतुर है और वह ऐसा आसरा प्रतिदिन बनाती थी कि 39 कैमरों को नजर न आए। उन्होंने बताया कि पांच बचाव अभियान असफल होने के बाद आखिरकार वह गुरुवार को जाल में घिर गई।
उन्होंने बताया कि शर्मिली को पकड़ने लिये छठा अभियान 15 दिन पहले शुरू हुआ था और 39 कैमरों के जरिए, 1400 एकड़ मे फैली बंद पड़ी रबड़ फैक्टरी में उसकी निगरानी 24 घंटे की जा रही थी।
वर्मा ने बताया कि गुरुवार सुबह वह चूना कोठी के पास खाली टैंक में बैठी देखी गई। बाघिन का ठिकाना जिस टैंक में था, उसकी परिधि 10 मीटर और गहराई 25 फुट है। उन्होंने बताया कि उस टैंक से बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता है और जैसे ही वह बाहर निकली, मुहाने पर लगाए गए पिंजरे में कैद हो गई।
बाघिन 'शर्मीली' की लंबाई 11 फीट और वजन 150 किलो है। वर्मा ने बताया कि 24 घंटे से अधिक चले इस वृहद बचाव अभियान में विशेषज्ञों के अलावा 125 सदस्यों और दो डॉक्टरों को भी लगाया गया था।