बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। गेटवे ऑफ तराई के नाम से पहचान रखने वाले खीरी जिले में जंगल के आसपास बसे गांवों में लगातार हो रहे बाघ के हमलों से लोग दहशत में हैं। ग्रामीण न दिन में आराम कर पाते हैं और न ही रात में सो पाते हैं। बच्चों और पालतू पशुओं की चिंता में रात भर जागने से गांव के लोग बीमार होते जा रहे है। दहशतजदा ग्रामीणों को हर वक्त इसी बात का डर लगा रहता है कि न जाने कब और किधर से बाघ का हमला हो जाए ।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन और दक्षिण खीरी वन प्रभाग जंगल से सटे दर्जनों गांव इन दिनों मानव-बाघ संघर्ष की त्रासदी झेल रहे हैं। हालत यह है कि गांव के लोग घर के बाहर बैठने में भी डर महसूस कर रहे हैं और बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतरा रहे हैं। इतना ही नहीं सुरक्षा को लेकर ग्रामीण रात को जाग रहे हैं। ऐसे में नींद पूरी न होने से ग्रामीण मानसिक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मनोचिकित्सक भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि पूरी नींद अच्छी सेहत के लिए जरूरी है।
क्या कहते हैं ग्रामीण
हर वक्त रहता है डर, किधर से हो जाए बाघ का हमला
जंगल से सटे अर्जुन पुर गांव निवासी रमेश कुमार भार्गव बताते हैं कि बाघों के आबादी के पास पहुंचने से ग्रामीण दहशत की जिंदगी गुजार रहे हैं। हर वक्त डर सताया करता है कि न जाने कब और किधर से हो जाए बाघ का हमला। इससे लोग मानसिक परेशानी झेल रहें हैं।
रात छोड़िए, दिन में भी है बाघ का खौफ
जंगल से सटे ग्रंट नंबर तीन निवासी दिलेर सिंह का कहना है कि रात छोड़िए अब तो दिन में भी बाघों का खौफ है। आबादी के पास पहुंच रहे बाघों के डर से लोगों की नींद उड़ी हुई हैं। नींद पूरी न होने से लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
बाघों के हमलों ने छीनी रात की नींद, दिन का चैन
बांकेगंज ब्लॉक की पूर्व प्रमुख बिटोला देवी बताती हैं बढ़ रहे बाघों के हमले से रात की नींद और दिन का चैन छीन सा गया है। लोगों के जेहन में हर समय बाघ का खौफ होने से ग्रामीण बीमार हो रहे हैं।
रात में नींद न होने से दिन में प्रभावित होता है काम
कस्बा निवासी कौशल किशोर का कहना है कि आबादी के पास पहुंच रहे बाघों के खौफ से लोगों को रात में नींद नहीं आती। रात में नींद न आने से दिन में खेती-किसानी का काम प्रभावित हो रहा है। इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी होता है। सोने से न केवल शरीर को बल्कि मस्तिष्क को भी आराम मिलता है। जंगल के आसपास रहने वाले लोग इस समय जिस दहशत के माहौल में रह रहे हैं इससे उनमें बीमारियों का बढ़ना स्वाभाविक है।
- डॉ अखिलेश शुक्ला, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल, खीरी
मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए वन विभाग की टीमें ग्रामीणों की सुरक्षा में तैनात हैं, उन्हें चिंता करने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है।
-डॉ. अनिल कुमार पटेल उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन