बांकेगंज। बाघ से पीड़ित परिवारों का वन विभाग हमदर्द बनेगा। उनके सुख-दुख में शामिल होकर उनकी कुशल क्षेम लेगा। बाघ हमले में शिकार लोगों का बाकायदा एक रजिस्टर तैयार होगा। जिसमें प्रभावित परिवार का पूरा विवरण अंकित होगा। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी समय-समय पर संबधित परिवारों से मिलकर उनकी कुशलता जानेंगे। जी हां, दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डाइरेक्टर संजय पाठक की पहल पर यह मुहिम शुरू की जा रही है। एफडी ने रेंज अधिकारियों से बाघ हमले में मृत या घायल लोगों की एक सूची बनाने और उसे बनाए गए रजिस्टर में दर्ज करने को कहा है।
तराई क्षेत्र में मानव-बाघ संघर्ष की लगातार हो रही घटनाओं के दौरान आम लोगों का विश्वास वन विभाग पर कायम रहे इसके प्रयास शुरू किए गए हैं। आमतौर से बाघ हमले की घटनाओं के बाद वन विभाग प्रभावित परिवार को मुआवजा देने के बाद अपना पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन अब वन विभाग लंबे अरसे तक प्रभावित परिवारों का ख्याल रखेगा। इस संबध में डीटीआर के एफडी ने एक अनूठी पहल शुरू की है।
बाघ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने पहुंचे एफडी ने सभी रेंज अधिकारियों को यह निर्देश दिए हैं कि बाघ हमले में मारे गए या घायल हुए लोगों का पूरा ब्योरा एक रजिस्टर में दर्ज किया जाए। बड़े अधिकारियों से लेकर रेंज स्तर तक के अधिकारी समय-समय पर प्रभावित परिवारों से मिलकर उनका दुख-दर्द साझा करेंगे और कुशलता जानेंगे। किसी तरह की जरूरत होने पर वन विभाग के अधिकारी उनकी हर संभव मदद भी करेंगे। एफडी के निर्देश पर रेंज अधिकारियों ने रजिस्टर तैयार कर बाघ हमलों से प्रभावित लोगों का ब्योरा दर्ज करना शुरू कर दिया है। इस कार्रवाई से भविष्य किसी भी स्थान पर बाघ हमले की घटनाओं का इतिहास भी पता चल सकेगा, और उसके अनुसार बचाव के प्रयास किए जा सकेंगे।
वन विभाग अब बाघ हमलों से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देकर ही पल्ला नहीं झाड़ेगा। बल्कि लंबे समय तक उनका ख्याल रखेगा। इस बाबत रेंज अधिकारियों को बाघ प्रभावित परिवारों का ब्योरा एकत्र कर रजिस्टर में दर्ज करने को कहा गया है। इस पहल से वन विभाग के प्रति ग्रामीणों का विश्वास कायम होगा।
- संजय पाठक, फील्ड डाइरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व।