नवाबगंज। इलाके का खाता गांव अजीबोगरीब रिश्तों के लिए चर्चित है। यहां मुस्लिम परिवार में तीन पाकिस्तानी महिलाएं ब्याही हैं। इनमें दो सगी बहनें हैं जो चचेरे-तहेरे भाइयों के घर तेरह बरस पहले दुल्हन बनकर आई थीं और अब उनके बच्चों की मां हैं।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानियों के देश छोड़ने के सरकारी फरमान से दीर्घकालिक वीजा पर रह रहीं तीनों महिलाओं के साथ उनके परिवार के लोग भी विचलित हैं।
बात करने पर उन्होंने पहलगाम की घटना पर अफसोस जताया। महिलाएं बोलीं कि वह भले ही पाकिस्तानी हैं, पर उनका दिल हिंदुस्तान के लिए धड़क रहा है।
जाने अली और कुलसुम का 13 बरस का साथ ः खाता गांव निवासी जाने अली का निकाह वर्ष 2012 में पाकिस्तान की कुलसुम फात्मा से हुआ था। दरअसल कुलसुम और मरियम सगी बहनें हैं। दोनों का एक ही दिन निकाह हुआ था। जाने अली और राशिद भी रिश्ते के भाई हैं।
जाने अली ने बताया कि उनकी पत्नी के परिजन पहले खाता गांव के ही निवासी थे। आजादी के वक्त पाकिस्तान चले गए थे। रिश्तेदार होने के चलते उनका निकाह हुआ था। वह पत्नी के साथ वर्ष 2018 में पाकिस्तान गए थे, लेकिन वहां एक माह काटना मुश्किल हो गया था। इस बीच उनकी मां निजाकत की मौत हो गई। इसके बाद वह पत्नी को पाकिस्तान छोड़कर हिंदुस्तान चले आए। बाद में पत्नी भी दीर्घकालीन वीजा लेकर भारत आ गईं। जाने अली की कोई संतान नहीं है। संवाद