फतेहगंज पश्चिमी। ग्राम पंचायत गौतारा में तीन लड़कियां रामगंगा नदी में डूब गईं। इनमें से एक को बचा लिया गया, जबकि रिश्तेदारी में आईं दो लड़कियों की मौत हो गई। बाढ़ से बचाव के लिए गांव के पास ठोकरों का निर्माण हो रहा है। इस वजह से नदी में खोदाई करके गहरे गड्ढे बना दिए गए हैं। इन्हीं गड्ढों की वजह से यह हादसा हुआ। गड्ढों को चिह्नित नहीं करने से ग्रामीणों में व्यवस्था के प्रति आक्रोश है।
थाना भोजीपुरा के गांव वीरपुर निवासी अनिल गंगवार की बेटी सलोनी (10) और थाना देवरनिया के गांव कासमपुर निवासी मुंशीलाल की बेटी कुसुम (15) पांच दिन पहले ग्राम पंचायत गौतारा के मजरा प्रेमपुर गौटिया निवासी मनोहर लाल के घर रिश्तेदारी में आई थीं। मनोहर लाल की पत्नी सलोनी की बुआ और कुसुम की मौसी हैं। शुक्रवार को सलोनी, कुसुम और मनोहर लाल की 17 वर्षीय बेटी मंगला रामगंगा नदी के पार खेत से तरबूज, खरबूज लेकर लौट रही थीं।
बृहस्पतिवार रात ही सिंचाई विभाग के ठेकेदार ने ठोकरे बनाने के लिए नदी से रेत निकलवाई थी। इससे किनारे पर 40 फुट गहरा गड्ढा बन गया था। तीनों लड़कियां इसमें डूब गईं। नदी के किनारे मौजूद चरवाहों ने शोर मचाया तो तमाम ग्रामीण जुट गए। कुछ देर प्रयास के बाद ग्रामीणों ने तीनों लड़कियों को निकाल लिया पर तब तक सलोनी और कुसुम की मौत हो चुकी थी।
मंगला के पेट में भी पानी भर गया था। हालांकि, उसकी हालत खतरे से बाहर है। उसे पुलिस ने खिरका सीएचसी में भर्ती कराया है। फतेहगंज पश्चिमी इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय ने दोनों लड़कियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी थी कि रात में किए गए गड्ढे को अगर चिह्नित कर लिया जाता तो हादसा टल सकता था। सिंचाई विभाग के जेई और अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। पीड़ित परिवार, ठेकेदार और जेई के बीच आर्थिक सहायता को लेकर वार्ता चल रही है।