तीन तलाक पर कानून बनाए जाने की प्रक्रिया में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को दखलंदाजी करने का कोई हक नहीं है। पर्सनल लॉ बोर्ड ने अगर यह दखलंदाजी बंद नहीं की तो ‘मेरा हक फाउंडेशन’ उसका खुलकर विरोध करेगा।
फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी ने सोमवार को यह बात एक प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि तीन तलाक के मुद्दे को शरीयत को बीच में लाकर उलझाने की कोशिश कर रहे पर्सनल लॉ बोर्ड ने न कभी यह सोचा कि तलाक पीड़ित महिलाओं को क्या त्रासदी भुगतनी पड़ रही है, न कभी पुरुषों को बुलाकर समझाया कि शरीयत में महिलाओं को भी बराबर का हक दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि तलाक पीड़ित महिलाओं के बच्चों की जिम्मेदारी लेने को क्या पर्सनल लॉ बोर्ड तैयार है। जिन लड़कियों की तीन तलाक से जिंदगी खराब हो गई, क्या उनकी जिम्मेदारी बोर्ड लेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्सनल लॉ बोर्ड शरीयत को घुमाफिरा कर पेश कर रहा है। असल में शरीयत इतनी कमजोर नहीं है कि इकतरफा बात करें। उन्होंने कहा कि तीन तलाक महिलाओं के लिए कलंक बन चुका है। सरकार को चाहिए कि वह बोर्ड की बातों पर ध्यान न दे।