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Bareilly News: तीन विभागों ने चार बार की जांच... अपना पल्ला झाड़ा, दूसरे पर डाली जिम्मेदारी

Mon, 22 Jun 2026 01:41 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। सिकलापुर में कैंसर की रोकथाम के उपाय करने के बजाय अफसर जांच से आगे नहीं बढ़ सके। नवंबर 2025 को ई-मेल के जरिये मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री और जिलास्तरीय अधिकारियों को प्रकरण की जानकारी दी गई। इसके बाद मंडलायुक्त ने तहसील, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) से चार बार जांच कराई। अधिकारियों ने हर बार पुख्ता कार्रवाई की जगह जिम्मेदारी दूसरे पर डाल दी। सात माह बाद भी यह तय नहीं हो पाया कि इस समस्या को कौन सा विभाग दूर करेगा? अब मंडलायुक्त की ओर से एसडीएम सदर को एक बार फिर जांच दी गई है।
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तहसील प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बताया जिम्मेदार
जांच एक
वार्ड-64 सिकलापुर के पार्षद जय प्रकाश राजपूत की ओर से 12 नवंबर 2025 को ई-मेल के जरिये शासन को मामले की जानकारी दी गई तो मंडलायुक्त ने एसडीएम सदर प्रमोद कुमार को जांच सौंपी। एक दिसंबर 2025 को मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार ने पार्षद व क्षेत्रीय लोगों के बयान लिए। एसडीएम सदर ने तीन दिसंबर को जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त कार्यालय भेज दी। इसमें शिकायत का निस्तारण न होने और कारण में प्रकरण को मांग संबंधी बताया गया। यानी पार्षद की ओर से कैंसर होने के जो कारण बताए गए हैं, उन्हें दूर नहीं किया गया। प्रकरण प्रदूषण से जुड़ा बताकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जांच कराने की संस्तुति कर दी गई।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बीडीए पर टाल दिया मामला
जांच दो
एसडीएम सदर की जांच रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी चंद्रेश सिंह को जांच का आदेश दिया। 22 दिसंबर को प्रदूषण बोर्ड की टीम ने सिकलापुर पहुंचकर मामले की जांच की। 26 दिसंबर को जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त को सौंप दी गई। इसमें बताया गया है कि क्षेत्र में फर्नीचर मंडी स्थापित है, जहां स्प्रे पेंटिंग का काम किया जाता है। इससे आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। हाईकोर्ट के वर्ष 2003 के एक फैसले का हवाला देते हुए आवासीय भू-उपयोग में व्यवसायिक गतिविधि को गलत बताते हुए बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) से कार्रवाई कराने की संस्तुति कर दी गई।
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बीडीए ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बताया जिम्मेदार
जांच तीन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रकरण बीडीए को भेजा गया। बीडीए की सचिव वंदिता श्रीवास्तव ने जांच करवाकर 14 जनवरी 2026 को रिपोर्ट मंडलायुक्त को भेज दी। इसमें स्थलीय निरीक्षण का हवाला देते हुए बताया गया है कि भू-उपयोग बरेली विकास महायोजना-2031 के तहत आता है। निर्मित क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति नियमानुसार मानचित्र स्वीकृत कराकर आवासीय या व्यवसायिक उपयोग कर सकता है। संबंधित क्षेत्र पुरानी आबादी के तहत आता है। वहां लोग पीढि़यों से रह रहे हैं। वर्तमान में कोई नव-निर्माण नहीं हो रहा है। धूल-मिट्टी, गंदगी, स्प्रे से प्रदूषण के संबंध में जांच व कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अपेक्षित है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फिर बीडीए के पाले में डाली गेंद
जांच चार
बीडीए की रिपोर्ट मिलने के बाद मंडलायुक्त की ओर से एक बार फिर मामला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजा गया। क्षेत्रीय अधिकारी की ओर से 31 जनवरी को मंडलायुक्त की रिपोर्ट भेजी गई। इसमें एक बार फिर फर्नीचर निर्माण एवं स्प्रे पेंटिंग का जिक्र करते हुए इसे औद्योगिक गतिविधि बताया गया। आवासीय क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधि संचालित होने की जानकारी दी गई। इस बार जांच रिपोर्ट के साथ एनजीटी के एक आदेश की प्रति भी संलग्न की गई। इसके हवाले से उद्योगों की शिफ्टिंग के लिए विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष या नगर निगम के प्रभारी अधिकारी को सक्षम बताया गया है। बीडीए से कार्रवाई की अपेक्षा भी की गई है।
एसडीएम सदर और सिटी मजिस्ट्रेट को फिर सौंपा गया मामला
अब मामला एसडीएम सदर प्रमोद कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा को सौंपा गया है। सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को सोमवार को बुलाया गया है और पूरी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। अफसरों का प्रयास है कि किसी भी कारोबार को नुकसान पहुंचाए बिना वहां फैल रहे वायु प्रदूषण को रोका जाए।

वर्जन
मंडलायुक्त से मिले आदेश के क्रम में सिटी मजिस्ट्रेट से बात की है। सिकलापुर के लोगों की समस्या को दूर करने के लिए प्रभावी कार्रवाई जल्द अमल में लाई जाएगी। - प्रमोद कुमार, एसडीएम सदर
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को बुलाया गया था। वे पूर्व में हुई जांच रिपोर्ट लेकर आए थे, जो नाकाफी थी। उनसे विस्तृत रिपोर्ट मांगी है जो सोमवार को मिल सकती है। इसके बाद जरूरी उपाय किए जाएंगे। - राजेश कुमार वर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट
सिकलापुर प्रकरण में जांचें कराई गई हैं और रिपोर्ट भी मिली हैं। क्षेत्र में स्थापित लकड़ी के कारखानों से कई लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। इन्हें शिफ्ट करना समस्या का हल नहीं है। यहां स्प्रे आदि मशीनों के जरिये जो वायु प्रदूषण हो रहा है, उसे रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए अधिकारियों से कहा गया है। - भूपेंद्र एस. चौधरी, मंडलायुक्त
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