दोनों पक्षों को सुनने व साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने अमर सिंह पुत्र सुल्तान यादव व रघुनंदन को हत्या की साजिश रचने के आरोप से बरी कर दिया। जबकि, सियाराम, कल्लू व अमर सिंह को दोषी करार देते हुए तीनों को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया।
गवाही से रोकने के लिए हत्या विधि के शासन पर प्रत्यक्ष आघात
न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने अपने आदेश में कहा कि गवाही से रोकने के लिए 58 वर्षीय निर्दोष व्यक्ति की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। यह कृत्य विधि के शासन पर प्रत्यक्ष आघात है। अभियुक्तों ने एक ही अपराध में अलग-अलग अधिवक्ता किए जिससे कि सुनवाई को लंबा खींचा जा सके। यही कारण रहा कि मुकदमा 17 साल चला।