मिलिट्री हॉस्पिटल में मेडिकल के लिए दो अभ्यर्थियों की जगह पहुंचे थेे दूसरे युवक
विज्ञापन
उत्तराखंड के हैं चारों आरोपी, एक भागने में कामयाब, मेजर ने लिखाई एफआईआर
बरेली। सेना में भर्ती के लिए दो अभ्यर्थियों ने अपनी जगह मेडिकल परीक्षण के लिए दूसरे युवकों को भेज दिया। फोटो के मिलान के दौरान फर्जीवाड़े का पता लगने पर दोनों अभ्यर्थियों के साथ एक युवक को गिरफ्तार कर लिया गया जबकि एक भागने में कामयाब हो गया। चारों आरोपी उत्तराखंड के नैनीताल और अल्मोड़ा इलाके के हैं। मेजर एसके मिश्र मोहर की ओर से उनके खिलाफ थाना कैंट में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
एफआईआर के मुताबिक अल्मोड़ा के विवेकानंदपुरी खतयारी गांव के ललित लटवाल और धीरज कुमार ने सेना में भर्ती के लिए आवेदन किया था। शुक्रवार को दोनों मिलिट्री हॉस्पिटल में मेडिकल कराने पहुंचे थे। ललित लटवाल की आंखों और धीरज कुमार की हड्डी की जांच होनी थी। बायोमेट्रिक प्रक्रिया के बाद जब उन दोनों को संबंधित विभाग में जाने को कहा गया तो उन्होंने अपनी जगह दूसरे युवकों को भेज दिया। नेत्र विभाग में आंखों की जांच के लिए ललित लटवाल की जगह नैनीताल के पोस्ट रातीघाट के गांव हरीशताल लावरडोवा का बलम सिंह मटियाली और हड्डी की जांच के लिए धीरज कुमार की जगह रातीघाट पोस्ट के ही गांव कौशिया टिटौली का ललित सिंह नेगी पहुंचा।
मेडिकल परीक्षण से पहले जब उनके फोटो का मिलान किया तो फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया। इस बीच धीरज सिंह तो वहां से भाग निकला लेकिन ललित सिंह नेगी, बलम सिंह और ललित लटवाल को सेना की टीम ने पकड़ लिया। काफी देर तक आरोपियों से पूछताछ करने के बाद सेना ने तीनों को कैंट पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने चारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके पकड़े गए तीन आरोपियों को जेल भेज दिया है।
पहले भी पकड़ी गई थी मेडिकल में फर्जीवाड़े की कोशिश
अक्तूबर 2020 में जाट रेजिमेंट में हुई कोटा भर्ती के दौरान आगरा के खेरागढ़ निवासी अंकित और इटावा के जसवंतनगर निवासी चंद्रवीर को मेडिकल में फर्जीवाड़े के मामले में पकड़ा गया था। अंकित की आंखें कमजोर थीं और चंद्रवीर को चर्म रोग था, जिसके चलते दोनों ने मेडिकल परीक्षण के दौरान एक-दूसरे की जगह ले ली और पकड़े गए।
वर्ष 2016 में भर्ती के नाम पर ठगने वाले गिरोह के चार लोगों को मिलिट्री इंटेलीजेंस ने रुपये का लेनदेन करते हुए दलाल समेत पकड़ा था। मगर गैंग का मास्टर माइंड फ रार हो गया था। जांच में एमईएस के कर्मी से सेना भर्ती के अहम दस्तावेज भी बरामद हुए थे। उस समय सुनील ने विजय कुमार निवासी गंगानगर, सुभाषनगर को गैंग लीडर बताया। टीम ने विजय की तलाश में छापेमारी की। मगर वह हाथ नहीं लग सका।
फरवरी 2015 में राजस्थान में धौलपुर के गांव पिदावली में रहने वाला शैलेंद्र परिहार फर्रुखाबाद के अभ्यर्थी मोनू पाल की जगह मेडिकल परीक्षण कराने की कोशिश में पकड़ा गया था। फोटो और फिंगरप्रिंट मैच न होने के चलते वह पकड़ में आया था और उसे इस काम के लिए पांच हजार रुपये मिले थे।