पुल पर दबिश देकर पकड़ा
रिषभ से पूछताछ कर जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने उसके पिता इंद्रदेव गंगवार के बारे में जानकारी जुटाई। दोनों के मोबाइल भी कब्जे में कर लिए। रिषभ के मोबाइल पर इंद्रदेव की कॉल आ रही थी। पुलिस ने रिषभ की निशानदेही पर मिनी बाइपास के पुल पर इंद्रदेव को हिरासत में ले लिया।
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इंद्रदेव से पुलिस ने एविल के 300 इंजेक्शन, 10 ऐल्प्रैसेफ टेबलेट के पत्ते और एक क्लोनाजेपम टेबलेट का पत्ता बरामद किया। पुलिस के अनुसार इन दवाओं को बिना डॉक्टर के पर्चे के बेचना गैरकानूनी है। इसलिए दवाओं को नशेड़ियों तक पहुंचाने पर मोटी कीमत मिल जाती है। तीनों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ इज्जतनगर थाने में एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज किया गया है।
उत्तराखंड के तस्कर ने बताया धंधे का तरीका
इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह ने पूछताछ की तो वीरेंद्र ने बताया कि वह प्रतिबंधित इंजेक्शन और दवा खरीदकर दोगुने दाम पर उत्तराखंड ले जाकर बेच देता है। एविल इंजेक्शन का इस्तेमाल एलर्जी में किया जाता है। वहीं ऐल्प्रैसेफ और क्लोनाजेपम टेबलेट का इस्तेमाल पैनिक डिसऑर्डर और तनाव वाली बीमारी में किया जाता है। तस्कर एविल इंजेक्शन को नशीला बनाने के लिए उसमें ऐल्प्रैसेफ और क्लोनाजेपम की टेबलेट पीसकर मिलाते हैं। इसके बाद नसों में सिरिंज के जरिये इसे लगाया जाता है।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि उत्तराखंड और बरेली के तस्करों का नेटवर्क तोड़ने के लिए पुलिस लगी है। इसमें निगरानी और दबिश की प्रक्रिया सतत रूप से जारी है। नशा व तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी।