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फर्जी दस्तावेज से जमानत कराने वाले तीन गिरफ्तार

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पकड़े गए आरोपी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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कोतवाली पुलिस ने एक और गिरोह का किया भंडाफोड़
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कोर्ट और थानों की फर्जी मुहरें बरामद, पांच लोग फरार

बरेली। फर्जी दस्तावेज से जमानत कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर कोतवाली पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से कोर्ट और थानों की फर्जी मुहरें भी बरामद हुई हैं। इनके पांच साथी फरार हैं। पुलिस उन्हें तलाश कर रही है।
कोतवाली पुलिस ने रविवार को फर्जी दस्तावेज से जमानत कराने के आरोप में अजय मिश्रा उर्फ राजाबाबू उर्फ भड़भड़ को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उससे पूछताछ के बाद पुलिस को रुपये लेकर जमानत कराने वाले पेशेवर लोगों के एक और गिरोह के बारे में जानकारी मिली। इस पर कोतवाली पुलिस ने बुधवार को मुख्य डाकघर के पास से कैंट के चौबारी में रहने वाले आच्छू सिंह, नरेंद्र सिंह और धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया। तलाशी में आरोपियों के कब्जे से सीजेएम कोर्ट, एसीजेएम-आठ के अलावा कोतवाली और कैंट इंस्पेक्टर की मुहरें और स्टांप पैड बरामद हुए। इसके अलावा कई खतौनियां भी मिलीं।
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कोतवाली इंस्पेक्टर पंकज पंत ने बताया कि आरोपी इन मुहरों के जरिये फर्जीवाड़ा कर लोगों की जमानत कराते थे। जब पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया तो उनके गिरोह के अन्य सदस्य चौबारी गांव में ही रहने वाले महेश, राजेश उर्फ लल्ला, मनोज, रंजीत और विपिन के सदर तहसील में होने की बात सामने आई। मगर जब उनकी तलाश में टीम भेजी गई तो आरोपी फरार हो गए।

अब तक सौ से ज्यादा लोगों की जमानत कराई

पकड़े गए तीनों लोग अब तक सौ से ज्यादा लोगों की जमानत करा चुके हैं। हालांकि जमानत के लिए वे अपनी जमीन के दस्तावेज का प्रयोग करते हैं लेकिन एक-एक व्यक्ति ने रुपये लेकर कई-कई लोगों की जमानत कराई हैं। हर आरोपी की जमानत के लिए अपराध के हिसाब से रुपये तय किए जाते थे। यह कीमत दो हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक होती थी।

इस तरह खुला मामला

रविवार को कोतवाली पुलिस ने फर्जी दस्तावेज के सहारे जमानत कराने वाले जालसाज अजय मिश्रा उर्फ राजा बाबू उर्फ भड़भड़ को गिरफ्तार किया था। अजय ने अपने खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मुकदमे में पत्नी रेनू मिश्रा और भाई विजय मिश्रा के नाम पर फर्जी कागजात तैयार कर खुद की जमानत करा ली थी। इस मामले की शिकायत अधिवक्ता नवनीत गौड़ ने की तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। साथ ही अजय मिश्रा, रेनू मिश्रा, विजय मिश्रा और उसके साथी अमित कुमार सक्सेना के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की थी।
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