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संघ का बैनर फाड़ने वालों पर चलेगा मुकदमा, राज्यपाल ने दी चार्जशीट को मंजूरी

सार

  • आंवला में बारावफात के जुलूस के दौरान पीपल की टहनी काटने की हुई थी कोशिश
  • अज्ञात लोगों पर रिपोर्ट के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर भेजा था जेल
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बरेली। आंवला में वर्ष 2018 में बारावफात का जुलूस निकालने के दौरान लोगों ने भारत माता के चित्र वाला आरएसएस का बैनर फाड़कर धार्मिक भावनाएं आहत की गई थीं। इस मामले में अज्ञात पर रिपोर्ट लिखकर पुलिस ने दो लोगों को जेल भेजा था। इन पर धारा 144 के उल्लंघन और धार्मिक भावनाएं आहत करने की धाराओं में कार्रवाई की गई थी। पुलिस के अनुरोध पर राज्यपाल ने इन दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगाकर अभियोग चलाने की मंजूरी दे दी है।
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नवंबर 2018 में धारा 144 लागू होने के बावजूद आंवला में डीजे के साथ बारावफात का जुलूस निकाला जा रहा था। जुलूस जब स्टेट बैंक शाखा के पास पहुंचा तो वहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक बैनर लगा था, जिस पर धार्मिक चित्र बना था। जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने इसके नीचे से अंजुमन निकालने पर आपत्ति जताई और रस्सी तोड़कर बैनर गिरा दिया। एक देवस्थान के पास खड़े पीपल के पेड़ की टहनियां काटने की भी कोशिश की गई। इस पर हंगामा हो गया। संघ से जुड़े लोगों ने आपत्ति जताई और रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की। इस पर पुलिस ने धारा 144 के उल्लंघन और धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद आंवला में मोहल्ला बजरिया निवासी मोईन रजा और पक्का कटरा के नदीम खां को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मुकदमे की विवेचना इंस्पेक्टर क्राइम उदयवीर सिंह कर रहे थे। उन्होंने दोनों आरोपियों पर चार्जशीट और अभियोग चलाने के लिए राज्यपाल से अनुमति मांगी थी। चार सितंबर को राज्यपाल से इसकी अनुमति मिलने के बाद विशेष सचिव प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव ने शासन और स्थानीय पुलिस को पत्र भेजकर इसकी मंजूरी दे दी है।

राज्यपाल की अनुमति से ही लगती है चार्जशीट

इंस्पेक्टर आंवला सुनील कुमार के मुताबिक इन आरोपियों पर धारा 188 और 295 ए के तहत कार्रवाई की गई थी। राज्यपाल की अनुमति के बाद अब दोनों आरोपियों पर चार्जशीट लगाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में राज्यपाल से अनुमति मिलने के बाद ही चार्जशीट लगाई जाती है इसलिए विवेचक की ओर से राज्यपाल को पत्र भेजा गया था।
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