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इस संडे मोदी बरेली में मंच से करेंगे किसानों के मन की बात

Sun, 28 Feb 2016 02:05 AM IST
बरेली
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किसान नेता बोले किसान नीति भी चाहिए
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 किसान नेता जेपीएस तोमर कहते हैं कि आज देश का किसान सबसे ज्यादा प्रताड़ित है। वह जितनी लागत लगाकर फसल उपजाता है, कई बार उसकी लागत भी नहीं निकल पाती है, इसलिए प्रधानमंत्री को चाहिए कि वह वे ऐसी किसान नीति बनाएं जिसमें किसानों को लागत के हिसाब से फसल का उचित समर्थन मूल्य दिया जाए। रालोद के नेता मोहम्मद इकबाल कहते हैं कि गन्ना, धान और गेहूं का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ता जबकि डीजल, पेट्रोल के दाम हर महीने बढ़ जाते हैं । इस पर सोचना होगा। भाकियू के जिला प्रभारी चंद्रप्रकाश कहते हैं कि फसल का मुआवजा भदिलाने के लिए भी कारगर नीति बननी चाहिए। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह कहते हैं अगर किसानों का कल्याण करना ही था तो कुल लागत में पचास फीसदी मुनाफा जोड़कर रेट तय किया जाता।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा की जरूरत
उत्तराखंड के नजदीक होने से बरेली में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की ज्यादा जरूरत है। एसआरएमएस के ट्रस्ट सचिव आदित्य मूर्ति का कहना कि सरकारी मेडिकल कॉलेज न होने की वजह से लोगों को लखनऊ और दिल्ली जाना पड़ता है। एनआरएचएम से स्वास्थ्य की योजनाओं में सुधार हो रहा है, लेकिन जिला अस्पताल को अभी और बेहतर करने की जरूरत है। शहर में एकमात्र सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जिला अस्पताल ही है।  यहां पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की बहुत कमी है। बिना स्टाफ के कोई भी चिकित्सालय नहीं चल सकता। इसकी कमी भी पूरी की जाए। आदित्य मूर्ति ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की मांग की है। उन्होंने बताया कि 2015 में यह योजना बंद कर दी गई। अगर यह योजना दोबारा शुरू कर दी जाएगी तो बीपीएल परिवारों को काफी लाभ मिलेगा। इसी तरह मानसिक चिकित्सालय के रि-स्ट्रक्चरिंग की जरूरत है।
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बरेली कॉलेज को मिले विवि का दर्जा
बरेली और मुरादाबाद मंडल के नौ जिलों के कार्यक्षेत्र वाले एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी पर लोड ज्यादा है और यहां संसाधन तथा सुविधाएं सीमित हैं  इन्वर्टिस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. उमेश गौतम का कहना है कि बरेली कॉलेज को अगर विश्वविद्यालय का दर्जा मिल जाए तो बरेली ही नहीं रुहेलखंड क्षेत्र को एक और बड़ा शैक्षिक संस्थान हासिल हो जाएगा। उनका सुझाव है कि केंद्र सरकार को ग्रांट देने में प्राइवेट विश्वविद्यालयों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जबकि आज के समय में प्राइवेट विश्वविद्यालय समानांतर रूप से शिक्षा में अपनी पहचान बना चुके हैं।


जरी-जरदोजी कारीगरों की अब तो सुनो
केंद्र में भाजपा की सरकार बनी और एक साल पहले मेगा क्लस्टर में जरी कारोबार को बढ़ावा देने के लिए प्रोजेक्ट तैयार हुआ।  निर्यात कम हो गया।  जरी कारोबार में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल टैक्स मुक्त कर दें या टैक्स कम करें तो कुछ राहत मिले।  पुराना शहर स्थित रोहली टोला, काजी टोला, रबड़ी टोला, काकर टोली, बुखार पुरा, सैलानी, सहसवान टोला, जगतपुर नवादा सेखान, कटरा चांद खां, जोगी नवादा, चक महमूद, सूफी टोला, गैर जाफर खां, सीबीगंज, रहपुरा चौधरी, कर्मचारी चौधरी, मोहनपुर तथा आसपास के ग्रामीण इलाकों में जरी के काम करने वाले अधिकांश परिवार खाली हाथ बैठे हैं। दस्तकार बुनकर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मुख्तार अंसारी कहते हैं कि कच्चा माल सस्ता मिले और कारीगर को बाजार मिल जाए तो आर्थिक स्थिति सुधरेगी।

मांझा कारोबार पर चाइनीज का हमला
गुजरात की पतंगों का बरेली के मांझे से रिश्ता नहीं जुड़ पाया। ये रिश्ता खुद मोदी जोड़ने की बात कह गए थे। मांझे के शहर बरेली में अब चाइनीज मांझा बाजार में छाया हुआ है, जो प्लास्टिक से बना होता है। धार तेज होने से पतंगबाज इसका खूब इस्तेमाल करते हैें। सिर्फ पंजाब में ही पतंगों के सीजन पर यह मांझा जाता है। इसके चलते बरेली के 10 हजार से ज्यादा मांझा कारोबारी आज बेरोजगारी के कगार पर हैं।  मांझा कारीगर आरिफ कहते हैं कि चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इसके बाद ही बरेली का मांझा फिर से दुनिया में चमकने लगेगा। सलीम खां कहते हैं कि प्रधानमंत्री को बरेली के मांझे का बाजार विकसित करके कारीगरों को बीमा और स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ना चाहिए।

ये दरगाहों को भी शहर है जनाब
बरेली सूफियों की सरजमीन हैं। जहां पर आला हजरत दरगाह, खानकाह निजिया, दरगाह शराफती, दरगाह शाहदाना वली, दरगाह बशीर मियां, दरगाह नासरी, दरगाह वली मोहम्मद मियां, खानकाह निशातिया वामिकिया जैसे आस्ताने मौजूद हैं।  ऐसी सूफियाना नगरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आना महत्वपूर्ण है। चूंकि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सूफिज्म की वकालत करते आए हैं।  इसलिए खानकाहों और दरगाहों ने भी मुस्लिमों की तरक्की और हिफाजत को लेकर उनसे काफी उम्मीदें जताई हैं। राष्ट्रीय महासचिव जमात रजा मुस्तफा मौलाना शहाबउद्दीन रजव कहते हैं इंग्लैंड  में  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सूफी विचारधारा के जरिए आतंकवाद से लड़ा जा सकता है। वह अबुधाबी की सूफी मस्जिद में भी गए। अब वह सूफियों की नगरी में आ रहे हैं। तो अब देखना यह है कि उनका लफ्जों से बढ़ कर आगे जमीन पर कुछ खाका खिंचेगा या फिर बात सियासत तक सिमट जाएगी।

मुसलमानों को भी समझें
प्रबंधक खानकाह शराफतिया हाजी मुमताज मियां कहते हैं सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार मुसलमान कमजोर तबका है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिक्षा के लिए कुछ सहूलियतें दें ताकि मुस्लिम बच्चे भी अच्छी शिक्षा पा सकें।  हमें शक की नजर से देखा जाता है।  बरेली मेें यूनानी मेडिकल कालेज खोला जाए। दरगाह आला हजरत के प्रवक्ता  मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी कहते हैं  मुस्लिमों का उत्थान व देश की मुख्यधारा से उनका जुड़ाव जरूरी है। आतंकवाद के नाम पर जो बेगुनाह मुस्लिमों को परेशान किया जा रहा है उसे भी रोका जाना चाहिए।

पीएम मोदी से हमें अपेक्षा है कि चंद बड़े पूंजीपतियों और मल्टीनेशनल कंपनियों को फायदा पहुंचाने में लगी अपनी सरकार के दो साल पूरे होने के बाद अब कम से कम किसान, नौजवान, मजदूरों, व्यापारियों और आम लोगों के हित के लिए कोई काम कर दें। जनता अच्छे दिन और काला धन वापस आने की उम्मीद कर रही है, प्रधानमंत्री कोई तो वायदा निभा दें।
-प्रवीण सिंह ऐरन, पूर्व सांसद


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चूंकि भाजपा की रैली के लिए आ रहे हैं इसलिए ये मौका नहीं है कि वह कुछ देंगे। वैसे भी एमएलसी चुनाव का आचार संहिता लागू है इसलिए वह कोई घोषणा नहीं कर सकते फिर भी उनसे उम्मीद कर सकते हैं कि वह बंद पड़ी रबर फैक्ट्री का कोई रास्ता निकालेंगे। बरेली में सीवर लाइन और सड़कों के लिए अतिरिक्त बजट की भी उनसे अपेक्षा कर रहे हैं।
-डॉ. आईएस तोमर, मेयर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट खंडपीठ की मांग पुरानी है। इस पर विचार करने के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बरेली और मुरादाबाद मंडल को लखनऊ बेंच से जोड़ने की अपेक्षा है। अगर ऐसा हो जाता है तो अधिवक्ताओं के साथ वादकारों की तमाम समस्याएं हल हो जाएंगे। सबको सहजता होगी।
-अमर भारती, सचिव बरेली बार एसोसिएशन

दवाओं के दाम बहुत बढ़ गए हैं। इसकी वजह से गरीबों के लिए दवाइयां खरीदना बहुत मुश्किल हो गया है। इनके दाम घटाए जाएं। स्वास्थ्य बीमा के नियम सहज और लचीले बनाए जाएं, ताकि गरीबों को आसानी से लाभ मिल सके। इसके लाभ के लिए उन्हें अस्पतालों के चक्कर न लगाने पकड़े। निजी अस्पतालों में हर सुविधा के लिए दाम तय हों, जिससे फीस के विवाद न खड़े हो।
-डॉ. रवीश कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष, आईएमए

उद्यमी कारोबारी बोले हमें दो माहौल
उद्यमी और कारोबारी भी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि कृषि क्षेत्र में पश्चिमी उत्तर प्रदेश काफी संपन्न हैं, लेकिन किसानों के प्रशिक्षण और कृषि वैज्ञानिक तैयार करने के साधन नहीं हैं,  औद्योगिक माहौल और कारोबार गारंटी योजना नहीं है। कारखानों में काम कर रहे श्रमिकों को समुचित इलाज नहीं हो पाता है। आम जनता सस्ता और आधुनिक चिकित्सा की आस लगाए हुए है। जाम की मुक्ति को चौड़ी सड़क और ओवर ब्रिज बनना जरूरी हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उद्योगों की काफी संभावनाएं हैं। कई कारणों से पुराने कारखाना चलाना आसान नहीं है। इसलिए औद्योगिक माहौल जरूरी है। इससे रोजगार सृजन ज्यादा होगा। हजारों कारखान श्रमिक इलाज के लिए परेशान हैं। कर्मचारी राज्य बीमा निगम काम नहीं करता है, हमने इस मामले में प्रधानमंत्री जी से पत्र लिखकर आग्रह किया है।
- घनश्याम खंडेलवाल, प्रदेश सचिव, आईआईए

कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा पश्चिमी उत्तर संपन्न है, लेकिन किसान और वैज्ञानिक प्रशिक्षण नदारद है। राष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय बने और स्तरीय शिक्षा केंद्र खोले जाएं। इससे उद्योग किसान और छात्र सभी लाभांवित होंगे।
- रजत शर्मा, निदेशक एनपी एग्रो

ओवर ब्रिज और चौड़ी सड़के
जाम से मुक्ति दिलाने के लिए चौड़ी सड़क और ओवर ब्रिज जरूरी है। इसके साथ ही शहरी विकास नियोजित तरीके से होना चाहिए। विकास कार्यों में आम लोगों की सुविधाएं फोकस हों।
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- अनुपम सक्सेना, आर्किटैक्ट

चीनी आयात शुल्क बढ़े
चीन से आने वाले सामान और उत्पाद पर 40 प्रतिशत आयात शुल्क शुल्क लगे। जीएसटी पारदर्शी हो और बीमार औद्योगिक इकाईयों के संरक्षण के लिए बैंक आगे आएं। आयकर छूट सीमा पांच लाख रुपये हो। इस मामले में एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
- राजेंद्र गुप्ता, प्रांतीय महामंत्री, उद्योग व्यापार मंडल
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