फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इन बेटियों में है बॉर्डर पर दुश्मनों को धूल चटाने का जज्बा

Thu, 15 Jun 2017 01:22 AM IST
बरेली। 
विज्ञापन
These daughters have the desire to dust the enemies on the border - फोटो : These daughters have the desire to dust the enemies on the border
विज्ञापन
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के मैदान पर एनसीसी का प्रशिक्षण ले रही बेटियों के इरादे सुनेंगे तो परिवार के साथ आप का भी सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। पढ़ाई के साथ-साथ घर का चूल्हा चौका करने वाली ये बेटियां अब देश के लिए बार्डर पर दुश्मनों से दो-दो हाथ लेने का जज्बा रखती हैं। उनको धूल चटा देने का जज्बा वो खुद में पैदा कर रही हैं। इनकी बस एक ही तमन्ना है कि उस वर्दी को पहनें जो देश के गौरव का प्रतीक है। देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत 530 गर्ल्स कैडेट कड़ा प्रशिक्षण ले रहीं हैं ताकि फोर्स में जाने का उनका सपना पूरा हो सके। उनका मानना है कि आज लड़कियां थल सेना, वायु सेना और नौ सेना हो या फिर पुलिस फोर्स या बीएसएफ, हर जगह कंधे से कंधा मिलाकर देश की सुरक्षा का जिम्मा बखूबी उठा रही हैं
विज्ञापन

आर्मी की वर्दी पहनना है सपना 
शिवानी सिंह केवी जेएलए की बारहवीं की छात्रा है और बरेली कॉलेज में एनसीसी यूनिट में भी हैं। बी सर्टिफिकेट मिल चुका है और सी के लिए अप्लाई किया है। शिवानी के पिता कविंद्र सिंह बरेली कॉलेज में शिक्षक है। शिवानी का एक ही सपना है कि आर्मी की वर्दी पहनकर वह देश सेवा कर सकें। बी सर्टिफिकेट ले चुकी बरेली कॉलेज की बीकाम की छात्रा पिंकी देवी अपने पिता शांति स्वरूप से आर्मी में जाने को प्रेरित हुईं। पिता ने कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लिया था। दीक्षा गंगवार भी एनसीसी का सी सर्टिफिकेट लेकर सेना में जाना चाहतीं है। उनके पिता आत्माराम किसान हैं। वह भी चाहते हैं कि बेटी सेना में जाए। बिशप कोनराड में पढ़ने वाली काव्या मौर्या आईपीएस ऑफिसर बनना है। नाना, मामा समेत परिवार के कई लोग आर्मी में रहे हैं, उन्हीं से वह प्रेरित है। साहू राम स्वरूप से एमए कर रहीं रजनी का भी एक ही सपना है कि वह आर्मी में जाएं। इसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रही हैं। तलवीन कौर और शिवानी यादव ने भी सी सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई किया है। शिवानी एयरफोर्स और तलवीन आर्मी में जाना चाहती है। उन्नति ने इसी ख्वाहिश में एनसीसी ज्वाइन की। वह आर्मी में मेडिकल सेवाओं में जाना चाहती है।
सर्टिफिकेट से कितना मिलता है फायदा
लेफ्टिनेंट डॉ. वंदना शर्मा के अनुसार बी सर्टिफिकेट के लिए दो साल का प्रशिक्षण होता है और सी सर्टिफिकेट के लिए तीन साल का प्रशिक्षण लेना होता है। सी सर्टिफिकेट वालों को सेना में सीधे एसएसबी के इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। उनको फिजिकल देने की जरूरत नहीं होती। बी सर्टिफिकेट पर पांच नंबर और सी सर्टिफिकेट पर दस नंबर का वेटेज भी मिलता है।
विज्ञापन

गर्ल्स कैडेट्स का प्रशिक्षण काफी अच्छा चल रहा है। लड़कियां पूरे जोश के साथ प्रशिक्षण ले रही हैं। एनसीसी के जरिए आसानी से वह सेना में जा सकती हैं। प्रशिक्षण में उनको देश सेवा और देश प्रेम का पाठ पढ़ाया जाता है।
विज्ञापन

- कर्नल एसके यादव, कमांडिंग ऑफिसर 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें