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ऐसे तो जनता पर और बढ़ जाएगा टैक्स

Tue, 23 Aug 2016 12:30 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
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शहर विधायक डा. अरुण कुमार की याचिका पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद नगर निगम 2014 की टैक्स दरें लागू करने का मन बना रहा है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि अगर दो साल पुरानी टैक्स दरें दोबारा लागू हो गईं तो शहर की जनता पर गृह, जल और सीवर कर का भार बढ़ जाएगा। सौ से ज्यादा जगहों पर रहने वाले आवासीय और कामर्शियल करदाताओं को वर्तमान दरों से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा टैक्स अदा करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, नई दरों से अब तक अपना टैक्स जमा कर चुके करदाताओं से टैक्स की बढ़ी राशि वसूली जा सकती है। इन सबसे करदाताओं की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ने वाली हैं।
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 नगर निगम ने अप्रैल 2014 में टैक्स की पुरानी दरें रिवाइज करके नई दरें लागू कर दी थीं। इसमें करदाताओं के पुराने टैक्स बिलों में 10 से 25 गुना तक की बढ़ोत्तरी हो गई थी। शहर के व्यापारियों, आम करदाताओं और भाजपा की टैक्स विरोधी संघर्ष समिति ने बढ़ी दरों के विरोध में धरना प्रदर्शन और आंदोलन किए थे। मेयर डा. आईएस तोमर ने टैक्स की बढ़ी दरों का खुद विरोध किया था। करदाताओं और पार्षदों के बीच टैक्स की बढ़ी दरों के भारी विरोध को देखते हुए मई 2015 में नगर निगम ने टैक्स की दरें रिवाइज कीं। इसमें सिविल लाइंस, रामपुर गार्डन, राजेंद्र नगर, मॉडल टाउन, डीडीपुरम, पवन विहार, ग्रीन पार्क, गोल्डन ग्रीन पार्क, सीबीगंज, परसाखेड़ा समेत शहर के करीब सौ स्थानों पर सर्किल रेट के आधार पर नई टैक्स दरें लागू कर दी गईं जिनमें टैक्स काफी कम हो गया था। अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह के अनुसार शहर विधायक और भाजपा नेताओं की रिट पर उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए नगर निगम आदेश की कापी मिलते ही नई दरों से टैक्स वसूलना तत्काल प्रभाव से बंद कर देगा। जब तक टैक्स दोबारा रिवाइज होगा, तब तक 2014 की दरें लागू की जाएंगी जो वर्तमान दरों से अधिक हैं। इससे जनता पर टैक्स का भार बढ़ेगा। जो लोग टैक्स जमा कर चुके हैं, उनसे भी बढ़ी दरों पर टैक्स वसूलने की संभावना बढ़ गई है।  
सुप्रीम कोर्ट भी जा सकता है नगर निगम
अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह ने बताया कि अभी नगर नगम को हाईकोर्ट के फैसले की कापी नहीं है। निर्णय की प्रति मिलते ही टैक्स दरें रिवाइज करने समेत तमाम बिंदुओं पर विचार विमर्श किया जाएगा। अगर पुरानी दरें लागू नहीं होती हैं तो सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की जा सकती है। हालांकि इस पर निर्णय मेयर और नगर आयुक्त समेत टैक्स अफसरों की सहमति से होगा। 
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