पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साए में दूसरे प्रांतों के मंत्रियों की गाड़ियां बरेली में फर्राटा भरती रहती हैं। यहां तक कि शहर से एयरपोर्ट तक उनकी गाड़ियां पुलिस प्रशासन के एस्कार्ट के साथ बिना किसी चेकिंग के पहुंचती हैं लेकिन अपने शहर के केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार के प्रोटोकाल की स्थानीय प्रशासन ने परवाह नहीं की। वह शनिवार को अपनी गाड़ी से केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अगवानी के लिए त्रिशूल एयरपोर्ट गए, वहां पर उनकी गाड़ी को रोक लिया लेकिन वहीं अफसरों की गाड़ियां फर्राटा भरते हुए बिना किसी चेकिंग के अंदर घुस गईं। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने प्रशासन से प्रोटोकाल के लिए मना क्या किया अफसरों ने भी अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया। प्रशासन ने उनको अपने पर ही छोड़ दिया, जिसका प्रभाव शनिवार को त्रिशूल एयरपोर्ट पर दिखाई दिया। अन्य पास धारकों की तरह उनकी चेकिंग की गई और पास भी मांगा गया। उसी दौरान एसएसपी तथा अन्य अधिकारियों की गाड़ियां बिना रुके निकल गईं। जिसको देखकर केंद्रीय मंत्री ने चेकिंग करने वाले सेना के अधिकारियों से टिप्पणी भी कर दी। प्रशासन की ओर से मंत्री के साथ एस्कार्ट में पुलिस और मजिस्ट्रेट होते तो यह घटना नहीं होती।
यहां हुई चूक
प्रतिबंधित क्षेत्र हो या फिर अन्य महत्वपूर्ण स्थान। ऐसी जगहों पर प्रशासन को चाहिए कि केंद्रीय मंत्री को प्रोटोकाल के साथ भेजे। जिससे कि उनकी गाड़ी को चेकिंग के लिए न रोका जा सके। यदि मंत्री के साथ अन्य कोई पास धारक हो तो सुरक्षा की दृष्टि उनको दूसरी गाड़ी से भिजवाने का अनुरोध किया जाए। साथ में चेकिंग वाले गेट पर सेना के साथ-साथ मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियोंा की तैनाती हो, जो कि मंत्री तथा अन्य वीवीआईपी की पहचान कर सेना के अधिकारियों को उनके प्रोटोकाल के बारे में बता सके।
केंद्रीय मंत्री की कार को चेक नहीं किया, उनके साथ बैठे लोगों की चेकिंग की गई थी। जहां तक पुलिस अधिकारी की कार को चेक न करने का सवाल है, वह पहले से ही चेक की हुई थीं।’ आर मुथवैल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, त्रिशूल एयरपोर्ट
‘आम तौर पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री प्रोटोकाल में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगाने की मना करते हैं। लेकिन उनके आगमन के कार्यक्रम में प्रोटोकाल के तहत मजिस्ट्रेट और पुलिस एस्कार्ट का उल्लेख होता है। इस बार भी अपर नगर मजिस्ट्रेट पारसनाथ मौर्य की तैनाती की गई थी।’ उमेश मंगला, सिटी मजिस्ट्रेट