बरेली। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में ऑनलाइन घूसखोरी में जिला समन्वयक धर्मपाल सिंह की बर्खास्तगी के बाद डीएम अब पूरे मामले की तह तक जांच करा रहे हैं। इस जिला समन्वयक का चयन कब और कैसे हुआ। सेवा प्रदाता एजेंसी के भी चयन में क्या प्रक्रिया अपनाई गईं, नवीनीकरण कब और किन नियमों के तहत हुआ आदि बिंदुओं पर विस्तृत जांच के लिए सीडीओ को निर्देश जारी किए हैं।
डीएम अविनाश सिंह ने बताया कि जिला समन्वयक धर्मपाल सिंह के विरुद्ध सीओ सिटी द्वितीय अजय कुमार की प्रारंभिक जांच में ही भ्रष्टाचार साबित हो गया था। इसके बाद उन्होंने उपायुक्त स्वत: रोजगार योगेंद्र कुमार भारती से जांच कराई, उसमें भी उसके विरुद्ध आरोप सत्य साबित हुए। जिस पर उसकी बर्खास्तगी हुई है, लेकिन डीएम ने कहा कि सवाल यह है कि सेवा प्रदाता एजेंसी ने इस जिला समन्वयक से कब सेवाएं ले रही थी और इसका नवीनीकरण कब-कब हुआ और किन शर्तों को पूरा करने पर इसे दोबारा सेवा में लिया गया...। इस तरह के कई बिंदुओं पर जांच की जरूरत है।
2021 में चयनित हुए थी केजीकेटी, कर्मियों का नवीनीकरण नहीं
पोषण मिशन के तहत सेवा प्रदाता एजेंसी केजीकेटी शिक्षा समिति का चयन 16 नवंबर 2021 को हुआ था। इसने कुल 17 पदों पर कर्मियों को तैनात किया था, जो जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय व ब्लॉक स्तर पर सेवाएं दे रहे हैं। इसमें जिला समन्वयक पद पर धर्मपाल सिंह व जिला प्रोजेक्ट एसोसिएट डीपीए पद पर लव श्रीवास्तव को नियुक्ति की थी। जिसमें जिला समन्वयक धर्मपाल सिंह को बर्खास्त किया जा चुका है। इसके अलावा ब्लॉक स्तर के को-ऑर्डिनेटर के 15 पदों पर एक-एक कर्मी तैनात कर रखा है। जिनमें किसी भी कर्मी की सेवा का नवीनीकरण नहीं किया गया है। केजीकेटी शिक्षा समिति के प्रोपराइटर बरेली महानगर के तुलसीनगर के ही निवासी हैं।