ऑक्सीजन न मिलने से मौत होने पर परिजन के हंगामे को भी भूले अफसर
बरेली। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में बरेली में भी ऑक्सीजन और बेड की जबरदस्त किल्लत थी। तमाम लोग भर्ती होने के लिए भटक रहे थे, मगर उन्हें ऑक्सीजन बेड नहीं मिल सके। इनमें से कइयों की मौत भी हो गई, लेकिन डेथ ऑडिट रिपोर्ट में ऑक्सीजन न मिलने से एक भी मौत दर्ज नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का दावा है कि जिनकी मौत हुई है, उन्हें दूसरी गंभीर बीमारियां भी थीं।
बरेली में 10 अप्रैल के बाद तेजी से संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ा था। 24 अप्रैल को सर्वाधिक 15 सौ से ज्यादा संक्रमित एक ही दिन में मिले थे। करीब माह भर तक हावी रही दूसरी लहर में करीब 30 हजार लोग संक्रमित हुए थे। जिले के 16 निजी और चार सरकारी कोविड अस्पतालों में बेड मुहैया कराने तक में समस्या थी। जो भर्ती हो रहे थे, उन्हें इलाज मिल रहा है या नहीं, इस पर नजर रखने के लिए परिजन अस्पताल परिसर या उसके बाहर डेरा डाले रहे। तमाम परिजन अपने मरीजों के लिए खुद ऑक्सीजन का सिलिंडर लेकर अस्पताल पहुंचे थे। ताकि ऑक्सीजन की कमी से मरीज की जान न जाए।
उस दौरान परसाखेड़ा समेत अन्य ऑक्सीजन सिलिंडर सप्लायरों के पास सिलिंडर ही खत्म हो गए थे। खाली सिलिंडरों को भरने के लिए ऑक्सीजन तक मुहैया नहीं थी। ऑक्सीजन कन्संट्रेटर या फ्लोमीटर के लिए मनमाने दाम वसूले जा रहे थे। जिला प्रशासन के छापे में कई सर्जिकल उपकरण बेचने वाले भी पकड़े गए थे। जिन पर कार्रवाई भी की गई। रेलवे के जरिए ऑक्सीजन सप्लायरों तक पहुंचाई गई। हालात इस कदर खराब थे कि लोग ऑक्सीजन सेचुरेशन में लगातार कमी होने पर अपने मरीज को लेकर एक से दूसरे अस्पताल दौड़ते रहे और उन्हें न बेड मिला और न ऑक्सीजन।
ऑक्सीजन की कमी से मौत होने पर तीमारदारों ने किया था हंगामा
रामपुर गार्डन स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती चार मरीज की 25 अप्रैल को मौत हो गई थी। परिजन का आरोप था कि ऑक्सीजन न मिलने से उनके मरीज ने तड़पकर दम तोड़ दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता जगदीश स्वरूप भटनागर के परिजन का कहना था कि अस्पताल के स्टाफ ने ऑक्सीजन खत्म होने की बात कही थी। इसके बाद मरीज की मौत हो गई। बीसलपुर की सुमन का आरोप था कि कचहरी में पेशकार आनंद कुमार सिंह की भी मौत भी ऑक्सीजन खत्म हो जाने के दौरान हुई। नवादा शेखान की बबली गुप्ता और दातागंज की शिवानी गुप्ता की भी मौत ऑक्सीजन की कमी से बताई गई थी। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों से साफ इनकार किया था।
तो ऑक्सीजन कन्संट्रेटर से देते थे ऑक्सीजन
तीन सौ बेड कोविड चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. वागीश वैश के मुताबिक दूसरी लहर में बड़ी तादाद में मरीज भर्ती हुए थे। मगर किसी भी मरीज की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई। अस्पताल में ऑक्सीजन कन्संट्रेटर भी थे। अगर एक मरीज का ऑक्सीजन लेवल सामान्य होता तो उसकी ऑक्सीजन बंद करके दूसरे को लगाते थे। जंबो और छोटे वाले करीब सौ से ज्यादा सिलिंडर अस्पताल में मौजूद थे। इससे दिक्कत नहीं हुई।
तब मैं था नहीं, इसलिए ज्यादा जानकारी नहीं
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान वह जिला सर्विलांस अधिकारी के पद पर तैनात नहीं थे। लिहाजा, उस दौरान की परिस्थितियों के बारे में वह ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते हैं। हालांकि, दावा किया है कि उनके संज्ञान में भी ऑक्सीजन न मिलने से कोई मौत होने का मामला नहीं है। रिपोर्ट में भी ऐसी कोई मौत दर्ज नहीं है।