बरेली। विद्युत कार्य मंडल ने दो करोड़ रुपये के कार्यों के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। इससे विभाग में एक बार फिर बंदरबांट की तैयारी शुरू हो गई है। उधर, चीफ इंजीनियर ने उपकेंद्र और लाइन निर्माण कार्यों में हुई गड़बड़ी की जांच शुरू करा दी है।
बरेली मंडल में नये उपकेंद्र, एचटी लाइनें, क्षमता आदि निर्माण कार्य के लिए 27 और 29 जनवरी को टेंडर मांगे गए हैं। जगतपुर उपकेंद्र-बालीपुर से भूमिगत केबल पर जोड़ना, फरीदपुर कुंआटांडा, पुवायां अमरिया, कटरा, गंगवारा आदि स्थानों पर एचटी लाइन निर्माण अमरिया, जमौर, पुवायां आदि उपकेंद्रों पर क्षमता वृद्धि आदि कार्य प्रस्तावित हैं। दो करोड़ रुपये से ज्यादा विभिन्न कार्यों के टेंडर जारी करने से पहले ही विभाग ने अपने ठेकेदार तय कर दिए हैं, इसलिए पूल योजना के तहत टेंडर देने की तैयारी है। विद्युत कार्य मंडल में होने वाले ज्यादातर कार्यों का भौतिक सत्यापन नहीं होता है, इसलिए कुछ ठेकेदार मिलीभगत से लाखों रुपये का सामान इधर-उधर कर देते हैं।
जांच शुरू
पिछले तीन वर्षों में विद्युत कार्य मंडल ने ज्यादातर कार्य कागजी ही कराए हैं। ठेकेदारों के लिए मंडल में काम करना सबसे सुरक्षित लगता है। यही वजह है कि ज्यादातर लाइन पूरी नहीं बनीं और भुगतान पूरा हो गया। उपकेंद्र क्षमता वृद्धि और सब स्टेशन निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुए हैं। पिछले दिनों निदेशक मध्यांचल बीपी वर्मा ने निरीक्षक किया तो हरूनगला - बीसलपुर मार्ग पर निर्माणाधीन उपकेंद्र पर अर्थिंग कार्य गलत मिला, जबकि कागजों पर विभाग ने पूरा सामान दिया था। ‘अमर उजाला’ ने इसे उजागर किया तो परतें खुलने लगी हैं। चीफ इंजीनियर बीके शर्मा ने प्रकाशित खबर पर जांच शुरू करा दी है। इससे विभाग में अफरा-तफरी मची हुई है। चीफ इंजीनियर ने मामले में सप्ताह भर में आख्या मांगी है।