बरेली। ऊसर और बाढ़ग्रस्त भूमि को कृषि योग्य बनाने के लिए जिले को वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी) योजना के अंतर्गत 22 करोड़ रुपये मिले हैं। इस धनराशि से भूमि संरक्षण विभाग गांवों में काम करवा रहा है। अब तक हुए कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूर्व विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल ने मुख्य सचिव से शिकायत की है। इसके बाद संयुक्त विकास आयुक्त ने जांच के लिए टीम बना दी है। बृहस्पतिवार से टीम गांवों में जाकर भौतिक सत्यापन करेगी।
प्रदेश के 32 जिलों को वाटरशेड विकास घटक योजना के तहत करोड़ों रुपये दिए गए हैं। योजना के अंतर्गत जिले की आंवला तहसील के 104 गांवों में भूमि संरक्षण के काम होने है। अब तक किटोना, कीरतपुर, सेंधा, इस्लामाबाद, क्योनाशादीपुर, कुड्डा, सिरोही, हजरतपुर, रामपुर बुजुर्ग, मकरंदपुर, धाराजीत, हजरतपुर, नौगवां ठाकुरान, कुंदरिया खुर्द, मझगवां, पराबाहुद्दीनपुर आदि गांवों में काम कराए गए हैं। आरोप है कि इन गांवों में मानक के अनुसार काम नहीं हुए हैं।
पिछले दिनों किटोना गांव के प्रधान नंद किशोर ने भी इसकी शिकायत की थी। इन गांवों में मेड़बंदी और बाढ़ के पानी निकासी के लिए निकासी के लिए पक्के काम हुए थे। उसमें घटिया सामग्री का प्रयोग होने पर प्रधान ने विरोध किया। उन्होंने बताया कि पक्के कार्यों की नींव मानक के अनुरूप नहीं बनाई गई। आरोप है कि ऐसे ही अन्य गांवों में भी घटिया सामग्री लगाई गई है।
पूर्व विधायक पप्पू भरतौल ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के अंतर्गत पक्का कार्य की निर्माण सामग्री खरीदने के लिए ऑनलाइन टेंडर किया था। उसका भुगतान कार्यवाहक भूमि संरक्षण अधिकारी संजय सिंह ने ऑफलाइन कर दिया है। ऐसे ही उसी योजना से बिलवा स्थित कार्यालय में बाउंड्री वॉल का निर्माण हुआ और जनरेटर खरीदा गया। इसका भुगतान भी ऑफलाइन किया गया। संयुक्त विकास आयुक्त प्रदीप कुमार ने बताया कि कई बिंदुओं पर शिकायत आई है। जांच टीम बनाई गई है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई तय होगी। संवाद