बरेली। आम बजट में विभिन्न योजनाओं के लिए धनराशि आवंटन के साथ ही शहर में अब कई विकास कार्यों को रफ्तार मिल सकेगी। सबसे बड़ा काम 265 करोड़ रुपये की लागत से अमृत 2.0 योजना के तहत 76000 घरों को स्वच्छ जल पहुंचाने का होगा। नगर निगम क्षेत्र में करीब 1.90 लाख घर हैं। इनमें एक लाख घरों में ही पेयजल आपूर्ति हो रही है। ऐसे में अब जो घर रह गए हैं उनके लिए 300 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाकर 19 ओवरहैड टैंक बनाए जाएंगे। साथ ही 37 नए नलकूप लगेंगे।
जल निगम के अधीक्षण अभियंता केके कटियार ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी से यह योजना संचालित है। इसलिए बजट के प्रावधान का फायदा शहर के लोगों को स्वाभाविक रूप से मिलेगा। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 में फरीदपुर, आंवला में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए 50 करोड़ रुपये मिलने का भी रास्ता साफ हो गया है। अमर उजाला ब्यूरो
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इन योजनाओं को भी मिलेगी रफ्तार
स्वच्छ भारत मिशन: जिले के 14108 परिवारों को मिलेंगे 12-12 हजार रुपये
स्वच्छ भारत मिशन में व्यक्तिगत स्वच्छ शौचालय के लिए राज्यांश से तीन और केंद्रांश से नौ हजार रुपये मिलते हैं। कुल 12 हजार रुपये की आर्थिक सहायता लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है। बजट में मिशन के लिए प्रावधान होने के बाद अब जिले के 14,108 परिवारों को स्वच्छ शौचालय बनाने के लिए 12-12 हजार रुपये मिलेंगे। अब तक धनराशि का अभाव था। बजट में प्रावधान होने से इन परिवारों तक आर्थिक मदद पहुंचने के आसार बन गए हैं।
कूड़ा प्रबंधन के लिए 495 गांवों को 24 करोड़ रुपये मिलेंगे
केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के लिए बजट का प्रावधान किया है। इससे केंद्रीय सहायता से चल रहीं कूड़ा प्रबंधन की योजनाओं को बजट मिलने के आसार हैं। जिले के 495 गांवों में कूड़ा प्रबंधन के लिए 24 करोड़ रुपये मिलेंगे। डीपीआरओ कमल किशोर ने बताया इससे गांवों को कूड़ा मुक्त करने के लिए काम होगा।
पीएम आवास योजना (शहरी) में दस हजार बेघरों को आशियाने की उम्मीद
बजट के बाद शहरी क्षेत्र में निवास कर रहे करीब दस हजार बेघर परिवारों को आशियाना मिलने की उम्मीद है। वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में अभी तक किसी जरूरतमंद को आर्थिक मदद नहीं मिल सकी। नगरीय विकास अभिकरण के कार्यालय में साल भर पहले 8829 बेघरों के आवास संबंधी आवेदन लंबित थे। अब यह संख्या दस हजार से ऊपर होने का अनुमान है। ऑनलाइन आवेदन कराए जा रहे हैं। आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों को इस बार बजट मिलने की उम्मीद है।
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बोले विशेषज्ञ...
बुनियादी क्षेत्र का विकास होगा, आयकर छूट ने क्रय शक्ति में किया इजाफा
- शहरी विकास निधि की स्थापना से बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) में वृद्धि होगी और रियल एस्टेट की संभावनाएं खुलेंगी। इससे शहरों का प्रमुख विकास केंद्र के रूप में विकास होगा। हालांकि होम लोन की बढ़ती ब्याज दरें और अफोर्डेबल आवास की पुरानी परिभाषा एक बहुत बड़ी बाधा है। इनका पुनर्निर्धारण जरूरी है। सुमित अग्रवाल, आर्किटेक्ट
- उम्मीद थी कि हाउसिंंग सेक्टर को उद्योग का दर्जा मिलेगा पर बजट ने इसे नहीं छुआ। अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए तीस लाख रुपये तक के ऋण पर ब्याज की छूट पहले से है। इसे पचास लाख तक करने की जरूरत थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हालांकि आयकर में छूट की सीमा बढ़ने से क्रय शक्ति में इजाफा होने का फायदा हाउसिंग सेक्टर को भी मिलेगा। सुनील कुमार गुप्ता, सचिव, क्रेडाई
- हाउसिंग के मामले में बजट बरेली के लिए पिछले साल जैसा ही है। कुछ नहीं मिला। हम लोग चाहते थे कि एक करोड़ रुपये तक के बैनामों को टीडीएस से मुक्ति मिले लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पचास लाख रुपये से अधिक के बैनामे पर एक प्रतिशत की दर से टीडीएस जमा करना पड़ता है। राजेश गुप्ता, सदस्य, क्रेडाई