स्पेन की हाईस्पीड ट्रेन का ट्रायल अभी नहीं होगा। सारे सुरक्षा बिंदुओं पर तकनीकी मानक पूरे मिलने के बाद रेलवे बोर्ड रेल मंत्रालय को हरी झंडी देगा, तभी टेलगो के ट्रायल की अनुमति मिलेगी। इसके लिए रेलवे बोर्ड के मेकेनिकल मेंबर इंजीनियर हेमंत कुमार बुधवार को सुबह यहां पहुंच रहे हैं। वह अपनी टीम के साथ सुबह आठ बजे पहुंच जाएंगे और पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर के कारखाना में टेलगो का निरीक्षण करके उसकी तकनीकी जानेंगे। इस दौरान स्पेन की टीम उनको टेलगो का प्रेजेंटेशन भी देगी। हाईस्पीड ट्रेन के सभी तकनीकी पहलुओं को समझने के बाद मेकेनिकल मेंबर दिल्ली जाकर अपनी रिपोर्ट बोर्ड के चेयरमैन को देंगे। चेयरमैन उस रिपोर्ट को बोर्ड की तकनीकी समिति की बैठक में रखने के बाद विचार-विमर्श करेंगे। इस दौरान जरूरी हुआ तो टेलगो चलाने के बाबत आने वाली तकनीकी कमियों को पूरा करा लिया जाएगा। बोर्ड चेयरमैन जब सभी तकनीकी पहलुओं से संतुष्ट हो जाएंगे, उसके बाद ही ट्रायल की हरी झंडी देकर अपनी संस्तुति रेल मंत्रालय को भेज देंगे। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही टेलगो का ट्रायल हो सकेगा। इस प्रक्रिया में अभी एक महीना भी लग सकता है।
हाईस्पीड ट्रेन के ट्रायल पर सेफ्टी प्वाइंट का सवाल खड़ा हो गया है। स्पेन की इस ट्रेन यहां इज्जतनगर कारखाना में एसेंबल हो चुकी है और इसके लिए आई स्पेन की टीम जल्द से जल्द इसका ट्रायल करके अपने देश लौटना चाहती है, इसीलिए पहले ट्रायल की तिथि 25 मई तय की गई थी लेकिन रेल मंत्रालय ने ट्रायल से पहले यह जान लेना जरूरी समझा कि 160 से 200 किलोमीटी प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन को दौड़ाने की स्थिति में कहीं कोई संकट खड़ा न हो जाए। यह ट्रेन एक मिनट में औसतन तीन किलोमीटर की रफ्तार तय करेगी लेकिन अपने ट्रैक इस लायक हैं भी या नहीं। कोई हादसा हो, इससे बेहतर है कि पहले से इसके लिए उपाय कर लिए जाएं, यही सोचकर रेल मंत्रालय ने रेलवे बोर्ड को सेफ्टी मानक की कसौटी पर सभी तकनीकी पहलू परखने के आदेश दिए। बोर्ड के मेकेनिकल मेंबर इसीलिए यहां पहुंच रहे हैं। वह कारखाना की मेकेनिकल वर्कशाप और डीजल शेड का भी निरीक्षण करेंगे।