बरेली।
अकाल तख्त एक्सप्रेस के बी-3 कोच के ज्यादातर यात्री अपनी बर्थ पर सो रहे थे, रात करीब 12.45 बजे बर्थ नंबर आठ पर सफर कर रहे रविंद्र सिंह टायलेट में पहुंचे। एक संदिग्ध पॉलिथीन में टिफिन मिलने के चंद मिनटों में बोगी के अंदर का दृश्य बदल गया। चलती ट्रेन में लोगोें की दहशत इस कदर हावी हो गई कि कुछ यात्रियों ने कूदने की कोशिश तक की, लेकिन दूसरे यात्रियों ने उन्हें बचा लिया। परिचितों और हेल्पलाइन के नंबरों को मिलाते हुए यात्रियों के बीच चीख पुकार मच गई। कुछ यात्री समझाने की कोशिश कर रहे थे। यह आंखों देखा हाल उस कोच की महिला यात्री कमलजीत कौर ने बरेली जंक्शन में बातचीत के दौरान बताया। पंजाब से सवार हुई महिला यात्री के मुताबिक संदिग्ध टिफिन मिलने के बाद चंद मिनटों में उस हिस्से को पूरी तरह से खाली कर दिया गया। उन्होंने बताया कि अकबरगंज रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही पूरी ट्रेन खाली हो गई। जिसके बाद बम निरोधक दस्ते ने संदिग्ध विस्फोटक को निष्क्रिय कर दिया।
जंक्शन पर तयशुदा समय से आठ घंटा देरी से पहुंचने वाली ट्रेन संख्या 12317 अकाल तख्त के कोच बी 3 के टायलेट की एटीएस की बरेली इकाई ने दोबारा जांच की। संदिग्ध टिफिन को पहली बार देखने वाले बर्थ नंबर आठ पर सफर कर रहे रविंद्र सिंह से एटीएस ने दोबारा पूछताछ की। चूंकि ट्रेन महज छह मिनट जंक्शन पर रूकी, इसलिए एटीएस के दो पुलिसकर्मी ट्रेन में ही अगले गंतव्य के लिए चले गए। ट्रेन गुरुवार दोपहर करीब 1.45 बजे बरेली जंक्शन पहुंची। ट्रेन के अंदर विस्फोटक मिलने से यात्रियोें के लिए यह दहशत का सफर बन चुका था।
संदिग्ध का सुराग जुटाने की थी कोशिश
एटीएस यात्रियों से पूछताछ के जरिये संदिग्ध तक पहुंचने की कोशिश में थी, जिसने टायलेट में विस्फोटक पहुंचाया था। यही वजह रही कि बोगी में 12.45 बजे से पहले टायलेट की तरफ जाने वाले यात्रियों से एटीएस ने उस संदिग्ध युवक के बारे में जानना चाहा। एटीएस को टायलेट की खिड़की भी टूटी हुई मिली, आशंका यह भी है कि खिड़की के रास्ते संदिग्ध पैकेट अंदर डाला गया हो। वहीं अधिकारी मानते हैं कि हो सकता है कि आरक्षित बोगी में सवार किसी यात्री ने यह पैकेट एसी कोच में पहुंचाया हो।
जंक्शन पर चला सर्च ऑपरेशन
ट्रेन में बम मिलने के बाद आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीमोें ने जंक्शन का सर्च अभियान चलाया। संदिग्ध वस्तु और यात्रियों की जांच की गई। वहीं आला हजरत एक्सप्रेस के अतिरिक्त करीब आठ ट्रेनों में भी जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान संदिग्ध मिलने वालों से पूछताछ और पहचान पत्र जांचने के बाद छोड़ा गया।
मैं बर्थ पर सो रहा था, जब शोर मचा कि टायलेट में बम है। देखा तो यात्री बस भाग रहे थे, मैं टायलेट की तरफ गया, एक संदिग्ध पैकेट देखकर वापस बर्थ की तरफ भागा, एक बारगी तो समझ नहीं आया कि अब करना क्या है। जब तक अगला स्टेशन नहीं आया, बस भगवान को याद करते रहे।
- अनिल कुमार, पटना
कुछ शब्दों में बताना मुश्किल है, प्राण निकलने जैसा था। चलती ट्रेन से उतरकर भाग भी नहीं सकते थे। महिलाओं और बच्चों को देखकर हम लोगों में हिम्मत आई। महिलाओं को पीछे की तरफ ले जाया गया। मोबाइल पर कंट्रोल रूम को खबर देने के बाद जब बम के निष्क्रिय करने की बात सामने आए तब हम लोगों ने राहत की सांस ली।
- शिव साहू, बनारस
यह सफर नहीं भूल सकूंगी। जिंदगी और मौत के बीच हम चल रहे थे। हर मिनट लगता था कि बस अब बम फट गया और हमारी जिंदगी खत्म। सबसे बड़ी बात हम कुछ नहीं कर सकते थे। सिर्फ मोबाइल पर फोन करने के सिवा। मैं अपने बच्चे को चिपकाये अब भगवान से प्रार्थना करती रही।
- हर्ष सरन कौर, पटना
ट्रेन में एक धचका भी लगे तो ऐसा लगता था कि बम फट गया। बहुत मुश्किल था इन हालात में खुद पर काबू रखना। हमने बुजुर्ग, महिला यात्रियों को पहले टायलेट से दूर पहुंचा दिया। टीटीई को बताने के बाद जब स्टेशन पर बम डिफ्यूज करने की सूचना आई तो लगा कि अब सब काबू में हैं।
- सूर्य कांत, पटना