बरेली। बरसों से अवैध तरीके से भारत की नागरिकता ओढ़कर रह रहीं तीनों बहनें अनपढ़ हैं, लेकिन इनकी सच्चाई सामने आने से पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासतौर से मुनारा बी जिस तरह भारतीय दस्तावेज बनवाती रही और सघन जांच से बनने वाले पासपोर्ट-वीजा पाती रही, इससे साबित हो रहा है कि प्रशासनिक मशीनरी से लेकर पासपोर्ट दफ्तर तक माफिया की जड़ें गहरी हैं। कायदे से विवेचना होने पर कई जिम्मेदारों की गर्दन फंस सकती हैं।
तीनों बहनों ने न केवल फर्जी दस्तावेज बनवाए, बल्कि मुनारा ने इन दस्तावेजों के जरिये पासपोर्ट हासिल कर विदेश यात्राएं भी कीं। वह कई साल से एलआईयू, पुलिस और एयरपोर्ट पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों को गच्चा देती आ रही है। जहां आम आदमी को पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस व तहसील प्रशासन के चरणबद्ध सत्यापन से गुजरना पड़ता है। पासपोर्ट दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं, मुनारा बी अपनी बहन के नाम से पासपोर्ट बनवाकर आराम से विदेश घूम आई। वह खाड़ी देशों की भी यात्राएं कर चुकी है।
खास बात यह है कि मुनारा पर कभी किसी को शक नहीं हुआ और न ही किसी ने उसकी चुगली की। जिस तरह मुनारा ने दलालों व संबंधित विभागों के जिम्मेदारों की मदद से फर्जीवाड़ा कर अपनी सच्चाई छिपाती रही, वह हैरतंगेज है। कायदे से विवेचना में तत्कालीन कई तहसील कर्मी, पुलिसकर्मी, एलआईयू स्टाफ व पासपोर्ट दफ्तर का स्टाफ इस धांधली के लपेटे में आ सकता है। पासपोर्ट बनवाने वाले दलाल, विदेश यात्रा के लिए भेजने वाली एजेंसियों के लोग भी फंसेंगे। ब्यूरो