बरेली। स्मार्ट सिटी के तहत सात करोड़ रुपये खर्च कर बना राइफल क्लब स्थित शूटिंग रेंज में ताला लटका हुआ है, इसके साथ ही टेंडर भी अधर में है। टेंडर में शर्ताें के मापदंडों पर फर्में खरे उतर ही नहीं पा रही हैं, फिर भी चौथी बार में बिना संशोधन के ही टेंडर प्रक्रिया को शुरू किया गया है। पिछली बार केवल दो फर्म ही प्रक्रिया में शामिल हुई थीं जोकि शर्तों को पूरा नहीं कर पाईं।
राइफल क्लब के ज्वाइंट सेक्रेटरी (स्पोट्र्स) कमल सेन बताते हैं कि अभी लगभग 30 खिलाड़ी शूटिंग रेंज में अभ्यास कर रहे हैं। जिनकी प्रतिमाह फीस 500 रुपये है, जिसके तहत माह में रेंज की 18 हजार और साल में 1.80 लाख की कमाई हो रही है। वहीं टेंडर की शर्ताें के मुताबिक 12 लाख रुपये सालाना फर्म को स्मार्ट सिटी को देना है। ऐसे में उपयुक्त फर्में भी किनारा करते हुए दिख रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि टेंडर की शर्तों को शिथिल किया जाए।
टेंडर की शर्तों के मुताबिक रेंज के इंटीरियर, उपकरणों की देखरेख और समस्त संचालन की जिम्मेदारी भी होगी। एजेंसी का एक करोड़ का सालाना टर्नओवर, राइफल क्लब चलाने का अनुभव होना जरूरी है। इसके साथ ही 15 साल का कांट्रेक्ट भी किया जाना है। अधिकारियों के मुताबिक तीन बार निकली निविदाओं में टेंडर डालने वाली दोनों फर्माें को ही राइफल क्लब संचालन का अनुभव नहीं था। वहीं अब चौथी बार स्मार्ट सिटी की ओर टेंडर प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है, इसमें फर्माें को 12 जून तक का समय दिया गया है। 27 मई से खोली गई चौथी बार निविदाओं में अभी तक एक भी आवेदन नहीं आया है।
तीन बार टेंडर निकाले गए, लेकिन संचालन के लिए उपयुक्त फर्म नहीं मिल सकी। अब फिर से टेंडर निकाले गए हैं। उम्मीद है कि अबकी बार कोई उपयुक्त फर्म मिलेगी और शूटिंग रेंज का संचालन शुरू होगा। फर्म आवेदन करें, इसके लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। -शशिभूषण राय, एसीईओ स्मार्ट सिटी व अपर नगर आयुक्त