इसी वाहन में ले जाया गया कोरोना संक्रमित युवक का शव।
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परिवार वालों को जनाजे में आने से पहले दी गई ट्रेनिंग
बरेली। हजियापुर के कोरोना संक्रमित युवक का शव कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच शाम चार बजे मेडिकल कॉलेज की एंबुलेंस से हजियापुर के टीले वाले कब्रिस्तान ले जाया गया। युवक के परिवार के लोगों को दूसरी एंबुलेंस से यहां लाया गया। शव को सुपुर्दे खाक करने से पहले उन्हें पीपीई किट पहनाकर आखिरी बार दूर से मृतक का चेहरा दिखाया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम की मौजूदगी में शव को कोविड-19 की गाइडलाइन के मुताबिक दफना दिया गया। कोरोना संक्रमित के जनाजे में शामिल होने के लिए हजियापुर बस्ती के करीब एक दर्जन लोगों को पीपीई किट पहनने को दी गई। आईडीएसपी प्रभारी डॉ. मीसम अब्बास ने उन्हें पीपीई किट पहनने और उतारने का तरीका बताया। यह भी हिदायत दी कि कब्रिस्तान में कोई भी व्यक्ति शव के पास नहीं जा सकेगा, हालांकि फिर भी सुरक्षा के लिए पीपीई किट पहनना बेहद जरूरी है।
कोरोना संक्रमित होने से पहले ही युवक डायबिटीज, ब्लडप्रेशर और निमोनिया से ग्रसित था। 27 अप्रैल को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में उसका इलाज चल रहा था। तबीयत बिगड़ने पर उसे आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया था। मंगलवार देर रात उसकी मौत हो गई। कोविड-19 की गाइडलाइन के मुताबिक शव को सुपुर्दे खाक किया गया। - डॉ. रंजन गौतम, एसीएमओ/नोडल अफसर/जिला सर्विलांस अधिकारी
कोरोना संक्रमित की मौत ने बढ़ा दीं प्रशासन की मुश्किलें
बरेली। हजियापुर के कोरोना संक्रमित युवक की मौत के बाद जिला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब तक यह पता नहीं कर पाए हैं कि इस युवक को संक्रमित करने वाला सोर्स कौन था। उम्मीद की जा रही थी कि युवक की तबीयत में सुधार होने के बाद उससे इस मामले में मदद ली जाएगी, लेकिन देर रात उसकी मौत के साथ ही यह उम्मीद टूट गई है।
हजियापुर का कोरोना संक्रमित युवक झोलाछाप डॉक्टर था और टीबी डॉट्स सेंटर की आड़ में अवैध क्लीनिक चलाता था। उस तक कोरोना संक्रमण कहां से आया, स्वास्थ्य विभाग से लेकर पुलिस और प्रशासन तक की टीमें एक्टिव सर्विलासं के जरिये लगातार इसका सुराग तलाशने में जुटी हैं। पहले अबुधाबी से आए परिवार की मृतक महिला को कोरोना संक्रमित माना जा रहा था, मगर दो दिन चली पड़ताल के बाद साफ हो गया कि उसकी मौत किडनी फेल होने से हुई थी। रामपुर से कुछ लोगों के हजियापुर आने की चर्चा भी अब तक पुष्ट नहीं हो पाई है। सर्विलांस टीम के पास अब तक ऐसी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है कि लॉकडाउन के बाद कुछ लोग हजियापुर आए और फिर बिना नजर में आए वापस चले गए हों। शुरू से ही इन दोनों सूचनाओं को बेहद अहम मानते हुए छानबीन चल रही थी जो अब फ्लॉप हो गई है। लिहाजा अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए संक्रमण की चेन का पता लगाना और बड़ी चुनौती बन गया है।
आशंका: कहीं सामुदायिक संक्रमण की वजह न बन जाए यह सोर्स
बरेली। लगातार छानबीन के बाद यह पहले ही साफ हो गया था कि हजियापुर का संक्रमित युवक और उसका परिवार एक फरवरी के बाद कहीं भी बाहर नहीं गया था। ऐसी भी कोई पुष्टि नहीं हो पाई है कि कोई और संक्रमित व्यक्ति बाहर से इस बीच शहर आया हो। ऐसी स्थिति में काफी संभावना इस बात की है कि बरेली में ही संक्रमण की ऐसी कोई चेन मौजूद है, जिसकी एक कड़ी हजियापुर का झोलाछाप भी बन गया लेकिन इस चेन का पता नहीं लग पा रहा है। इस चेन की तलाश के लिए हजियापुर के साथ आसपास के मेडिकल स्टोर वालों से पिछले दिनों में कोरोना संक्रमित के इलाज में प्रयोग किए जाने वाली दवाएं, एंटीबॉयोटिक्स, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवा खरीदने वालों की पड़ताल की जा रही है। यह भी सख्त निर्देश दिया गया है कि इन दवाओं की खरीद करने वाले का नाम पता मोबाइल नंबर और आधार कार्ड नंबर भी नोट किया जाए। उधर, एक दिक्कत यह भी है कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को संक्रमित झोलाछाप के परिजन का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। सोर्स का पता न चलने पर आशंका जताई जा रही है कि कहीं यह समुदाय में संक्रमण फैलने की वजह न बन जाए।
झोलाछाप की कॉल डिटेल की पड़ताल में जुटी पुलिस
बरेली। झोलाछाप युवक को कोरोना संक्रमित करने वाले सोर्स की जांच में उसकी पत्नी का असहयोगात्मक रवैया देखते हुए पुलिस ने तीन मोबाइल नंबरों से की गई कॉल की डिटेल जुटाई है, इसके आधार पर छानबीन की जा रही है। जिला सर्विलांस अधिकारी एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम के मुताबिक, मोबाइल नंबर की छानबीन के साथ ही उन लोगों को भी चेक किया जा रहा है जिनका झोलाछाप ने इलाज किया था। इस काम में उसके क्लीनिक से मिले रजिस्टर की मदद ली जा रही है। हालांकि अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।