अखिलेश सरकार की प्राथमिकता वाले लोहिया समग्र गांव मुडिया हाफिज के लिए अफसर संपर्क मार्ग के टूटे पुल का निर्माण नहीं करा पाए। जनप्रतिनिधियों ने भी लाचारी जाहिर कर दी तो गांव वालों ने खुद ही पुल बनवाने का निर्णय कर लिया। आपस में सबने चंदा किया और 85 हजार रुपये जुटाकर 15 फिट लंबाई और इतनी ही चौड़ाई के पुल का निर्माण डेढ़ महीने में कराकर अपने लिए रास्ता बना लिया। अगर लंबी प्रक्रिया के बाद ये पुल सरकारी एजेंसी बनाती तो 3-4 लाख का एस्टीमेट बनना ही था।
करीब तीन हजार की आबादी वाला मुडिया हाफिज गांव वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिए लोहिया समग्र गांव के रूप में चयनित हुआ था लेकिन इस गांव में नाम भर के लिए काम कराए गए। गांव वाले अफसरों से कहते रहे कि गांव के संपर्क मार्ग पर स्थित पुल जर्जर है, इसका निर्माण करा दो लेकिन उनकी फरियाद नहीं सुनी गई। नतीजा यह हुआ कि पिछले साल सितंबर में यह पुल टूट गया। गांव को यही पुल प्रमुख रास्ता है जो धौराटांडा कस्बे से जुड़ता है इसलिए ग्रामीणों के लिए रास्ता बंद हो गया। गांव के प्रधान मोहम्मद उमर बताते हैं कि पुल बनवाने के लिए नहर और सिंचाई विभाग से लेकर बीडीओ और प्रशासन तक से फरियाद की। सांसद संतोष गंगवार और क्षेत्रीय विधायक शहजिल इस्लाम से भी गांव के लोग मिले और अफसरों से कहकर पुल बनवाने को कहा लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
कहा था- पैसा आएगा तब बनेगा
सिंचाई विभाग वालों ने कह दिया कि प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज देंगे। जब पैसा आएगा तब पुल बनवा दिया जाएगा। मुख्तार अंसारी बताते हैं कि पूर्व बीडीओ ने आश्वासन दिया था कि प्रस्ताव बनाकर भेज रहे हैं। मंजूरी के बाद पैसा आएगा तो काम शुरू करा देंगे। कुछ महीने तो इंतजार किया कि शायद पुल बन जाए लेकिन जब अफसरों और जनप्रतिनिधियों ने कुछ नहीं किया तो प्रधान मोहम्मद उमर से रायमशविरा करके लोगों से चंदा करके खुद ही पुल बनवाने का फैसला ले लिया। गांव के नसीब अहमद, इकबाल अहमद, मुहम्मद अख्तर, जहीर अहमद, महेश गंगवार, महेंद्र पाल, कृष्णपाल, शमशुल इस्लाम, जाकिर अली, जाहिद अली आदि गांव वालों ने एकजुट होकर पुल बनवा लिया। पुल बनवाने में गांव के लोगों ने श्रमदान भी किया।
कोट...
कब तक इंतजार करते कि अफसर पुल बनवाएंगे और हम निकल पाएंगे। उनके भरोसे रहते तो शायद ही पुल बनवा पाता और तब तक रास्ता निकलने की समस्या बनी रहती।
-मोहम्मद उमर, ग्राम प्रधान
पुल का निर्माण सिंचाई विभाग को कराना था। उनके स्तर से प्रस्ताव गया होगा तो मेरी जानकारी में नहीं है लेकिन यह पता है कि पुल का निर्माण गांव वालों ने खुद ही करा लिया।
-प्रमिला शर्मा, बीडीओ भोजीपुरा