बरेली। दिव्यांगता पुष्टि के लिए सीएमओ स्तर से गठित मेडिकल बोर्ड में जांच व्यवस्था ''''दिव्यांगता'''' से जूझ रही है। एक अदद ऑडियोमेट्री और बेरा जांच के न उपकरण हैं और न ही विशेषज्ञ। मानसिक रोग जांच उपकरण हैं, लेकिन क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट न होने से धूल फांक रहे हैं।
सीएमओ कार्यालय परिसर में प्रत्येक सोमवार को जिले की सभी तहसीलों से नए प्रमाण पत्र बनवाने और नवीनीकरण समेत अन्य कार्यों के लिए दिव्यांग शिविर आयोजित होता है। दूरदराज से आए मूक-बधिर आवेदकों की जांच के बाद ईएनटी विशेषज्ञ नियमानुसार ऑडियोलॉजिस्ट के प्रमाण पत्र के लिए ऑडियोमेट्री (प्योर टोन टेस्ट) और ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पॉन्स ऑडियोमेट्री (बेरा) टेस्ट के लिए लखनऊ केजीएमयू रेफर कर देते हैं। हालांकि परिजन निजी मेडिकल कॉलेज में निजी खर्च पर जांच कराकर रिपोर्ट लेकर देते हैं। तब कार्यालय से प्रमाणपत्र जारी होता है।
बताया जाता कि मेडिकल बोर्ड कमेटी के लिए ऑडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत है, लेकिन कई वर्षों से शासन स्तर से तैनाती नहीं हुई। लिहाजा, आवेदक चक्कर काटने के लिए विवश हैं। ऐसे ही मनोचिकित्सक हैं लेकिन न्यूरो संबंधी दिव्यांगता जांच के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट नहीं हैं।
मानसिक चिकित्सालय में होती है क्लीनिकल साइकोलॉजी जांच
मानसिक दिव्यांगता जांच संबंधी आठ से दस आवेदक शिविर में पहुंचते हैं। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट न होने से जांच के लिए मानसिक चिकित्सालय रेफर करते हैं। जिन आवेदकों को स्थिति पता है वे खुद से निजी सेंटर से जांच करा लेते हैं। इसमें भी रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया से चिकित्सक पंजीकृत नहीं है तो रिपोर्ट अमान्य होती है। दोबारा से जांच के लिए मानसिक चिकित्सालय भेजा जाता है।
कहीं उपकरण तो कहीं विशेषज्ञ का अभाव जांच पर भारी
मूक-बधिर जांच के लिए अतिरिक्त व्यवस्था के तहत नावल्टी स्थित संकेत विद्यालय संचालित है। यहां मनोवैज्ञानिक है, लेकिन जांच के उपकरणों का अभाव है। वहीं, जिला अस्पताल के मनकक्ष में जांच के सभी उपकरण हैं, लेकिन क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के अभाव में धूल फांक रहे हैं। बता दें कि प्रत्येक सोमवार शिविर में औसतन 60 आवेदक पहुंचते हैं। इनमें ऑर्थो और नेत्र संबंधी जांच के लिए विशेषज्ञ, उपकरण मौजूद हैं।
वर्जन
मानसिक दिव्यांगता जांच के लिए उपकरण हैं, लेकिन क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट न होने से मानसिक चिकित्सालय रेफर किया जा रहा है। जो मरीज निजी स्तर से जांच कराते हैं, उनमें आरसीआई पंजीकृत विशेषज्ञ की ही रिपोर्ट मान्य है। - डॉ. आशीष कुमार, मनोचिकित्सक
बेरा और प्योर टोन ऑडियोमेट्री टेस्ट के लिए बोर्ड में ऑडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत हैं, लेकिन तैनाती नहीं है। इसलिए आवेदकों को जांच के लिए केजीएमयू रेफर करते हैं। निजी स्तर पर पंजीकृत ऑडियोलॉजिस्ट की रिपोर्ट भी मान्य है। - डॉ. एलके सक्सेना, ईएनटी विशेषज्ञ