बरेली। चंद रोज पहले अफसरों ने कुसुमनगर में नहर की जमीन पर बने जिस ‘शिव स्विमिंग पूल’ को ध्वस्त करने का जोर शोर से दावा किया था, वह आज भी सही सलामत है। फिलहाल सर्दियां हैं, इसलिए बंद है लेकिन जल्द ही उसे चालू कर दिया जाएगा। आसपास के लोगों ने नहर विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि करीब छह सालों से अफसर अक्सर नापजोख करने पहुंचते हैं लेकिन ध्वस्तीकरण के नाम पर सिर्फ आश्वासन देकर लौट जाते हैं। इस बार कार्रवाई के लिए पहुंचे भी तो दीवारें और फर्श का कुछ हिस्सा खुरचकर लौट गए।
सोमवार को नहर विभाग के अफसर लावलश्कर के साथ कुसुमनगर में नहर की जमीन पर बने स्विमिंग पूल को ध्वस्त करने पहुंचे थे। वहां उन्होंने जमीन की नापजोख की। इस दौरान आसपास के लोगों से नोंकझोंक भी हुई लेकिन स्विमिंग पूल चलाने वाला शिवकुमार गायब हो गया। सुबह से शाम तक चली कार्रवाई के बाद अफसरों ने दावा किया कि स्विमिंगपूल ध्वस्त कर दिया गया है, लेकिन यह दावा झूठा निकला। दरअसल, ध्वस्तीकरण करने पहुंची नहर विभाग की टीम ने स्विमिंगपूल को तो छुआ तक नहीं। बस पूल की बाउंड्री को करीब एक फुट गिरा दिया। फर्श का कुछ हिस्सा खुरच दिया। इसके बाद टीम ने उच्चाधिकारियों को अपने इस काम की फोटो समेत रिपोर्ट भेजकर वाहवाही बटोर ली। नहरों की जमीन पर कुछ और अवैध कब्जे हटाने के लिए 26 फरवरी और चार मार्च को ध्वस्तीकरण की तिथि निर्धारित की गई है, लेकिन इसमें भी महज खानापूर्ति होने की आशंका जताई जा रही है।
गुस्से में हैं कुसुमनगर के लोग
नहर विभाग के खोखले दावों पर कुसुमनगर के निवासी गुस्से में हैं। उनके मुताबिक नहर विभाग की ओर से की जा रही नापजोख में भी केल हो रहा है। कहा, साल दर साल अफसर और कर्मचारी वहां पहुंचते हैं और नापजोख करते हैं। इस गतिविधि से उनमें नहर की खुदाई की उम्मीद जगती है, लेकिन यह 19 सालों बाद भी पूरी नहीं हो सकी है।
पुलिया की ईंटों से भर दी नींव
बताया जाता है कि स्विमिंग पूल के ठीक सामने एक पुलिया थी, जिसे कुछ साल पहले ही संचालक ने ध्वस्त कर उसकी ईंटें घर बनाने में प्रयोग कर लीं। मामले पर स्थानीय लोगों ने भी आपत्ति जताई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि पूल संचालक ने ही नहर क ी जमीन पाटकर उन्हें गुमराह कर बेची है। अगर, उनके घर पर बुलडोजर चलेगा तो भारी विरोध होना तय है।
स्विमिंग पूल को ध्वस्त करने में कोई कोताही नहीं की गई है। तमाम विरोध के बावजूद जितनी जमीन पर कब्जा था, उसे पूरी तरह ध्वस्त किया गया है। आगे भी जीते हुए मुकदमों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। सिटी मजिस्ट्रेट से स्वीकृत मिल चुकी है, जल्द ही एसएसपी को पत्र लिखा जाएगा। - एसएस यादव, एक्सईएन, रुहेलखंड नहर विभाग