बरेली। सपा को आपसी कलह से उबारने वाले जिलाध्यक्ष की तलाश है। आगामी चुनाव के मद्देनजर भाजपा की जिला कार्यकारिणी का गठन होना है। नवरात्र में दोनों दलों की तलाश पूरी होने की चर्चा है।
सपा की जिला और महानगर कार्यकारिणी की आपसी तनातनी और अंतर्कलह पार्टी मुखिया तक पहुंची तो पिछले माह जिला कार्यकारिणी भंग कर दी गई थी। पार्टी ने साफ कर दिया था कि संगठन में अब चेहरा नहीं, प्रदर्शन करने वालों को ही कुर्सी मिलेगी। लंबे समय से निराश चल रहे कार्यकर्ताओं में से आठ-दस दावेदार लखनऊ तक दौड़ लगा चुके हैं। बताते हैं कि पार्टी हाईकमान कैडर वोट बैंक को सहेजने के साथ ही विपक्षी खेमे में सेंधमारी करने वाले दावेदार की तलाश में हैं। लिहाजा, यादव, मुस्लिम चेहरों के अलावा अन्य विकल्पों पर भी नजर है। बताते हैं कि अबकी बार जो भी जिलाध्यक्ष बनेगा, वह मजबूत स्थिति में रहेगा। सब ठीक रहा तो नवरात्र में नया चेहरा मिलने की उम्मीद है।
टिकट मांगने वाले और मुस्लिम दावेदार सूची से बाहर
जिला कार्यकारिणी भंग होने से एसआईआर की निगरानी और चुनावी तैयारियां प्रभावित हुई हैं। आकलन है कि जो विधानसभा चुनाव 2027 का टिकट मांग रहे हैं, वह पहले ही बाहर हैं। महानगर अध्यक्ष पद भी मुस्लिम के पास है, इसलिए मुस्लिम जिलाध्यक्ष चुना जाना मुश्किल है। यादवों में पूर्व जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव, पूर्व जिला महासचिव योगेश यादव, कुर्मी समाज से मनोहर पटेल, नरोत्तम पटेल, पाल समाज से राजकुमार पाल प्रमुख दावेदार हैं।
जिले से ज्यादा महानगर टीम से जुड़ने की छटपटाहट
भाजपा के बरेली जिला, महानगर और आंवला संगठन के अध्यक्षों की घोषणा के बाद अब पार्टी कार्यकारिणी के अन्य पदों को भरने में जुटी है। प्रत्येक संगठन में 20 पदाधिकारी चुने जाने हैं। बीते दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पर्यवेक्षक दावेदारों के नाम साथ ले गए थे। बताते हैं कि महानगर टीम में शामिल होने वालों की लंबी सूची है। देशभर से कार्यकारिणी के लिए दावेदारों की सूची पहुंचने का अंतिम दिन 12 मार्च रहा।