जिनके मकानों के मानचित्र नहीं हैं स्वीकृत, उन्हें सता रहा कार्रवाई का डर
बरेली। शहर के जखीरा, नौमहला, फाइक एन्क्लेव और सैलानी इलाकों में खामोशी का आलम है। यहां जिनके मकानों के मानचित्र स्वीकृत नहीं हैं, उन्हें कार्रवाई का डर सता रहा है। सायरन की हर आवाज से उनके दिल में सिहरन पैदा हो जाती है। पुलिस के बूटों की ठक-ठक कभी माहौल की खामोशी को भंग करती है, पर अगले ही पल माहौल सन्नाटे की चादर ओढ़ लेता है। जखीरा मोहल्ले में लगातार दूसरे दिन रविवार को भी बीडीए के बुलडोजर गरजे। लोगों ने नफीस के बरातघर को जमींदोज होते देखा तो उन्हें अपने अवैध मकान की चिंता सताने लगी। फाइक एन्क्लेव में मौलाना तौकीर रजा को पनाह देने वाले फरहत के मकान पर लगाई गई सील की निगरानी होती रही। नौमहला में जिन चार दुकानों को सील किया गया था, वहां भी पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारी आए और हालात देखकर लौट गए। फाइक एन्क्लेव में कुछ अन्य घर भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। इस आशंका में लोगों ने आपस में बातचीत की, लेकिन मीडिया से दूरी बनाए रखी। ब्यूरो
सैलानी बाजार खुला पर लापता रही रवानी
सैलानी में सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण हटाने के लिए शनिवार को नगर निगम के दो बुलडोजर करीब तीन घंटे तक गरजे थे। नाले-नालियों पर किए गए अवैध कब्जे गिराए गए थे। दुकानों के बाहर लगे टिन शेड भी तोड़े गए थे। रविवार को लोग हालात को संवारने में जुटे रहे। दुकानों के सामने नालों के स्लैब गिराए जाने के बाद लोगों ने अस्थायी तौर पर लोहे के जाल लगवाए। मार्केट खुलीं पर दुकानों में रोजाना से कम ग्राहक आए। दुकानदारों को रविवार को भी बुलडोजर कार्रवाई की आशंका सताती रही।
फरहत के घर के बाहर सन्नाटा, परिजन भूमिगत
फाइक एन्क्लेव में फरहत के घर के बाहर सन्नाटा मिला। सीलिंग से पहले ही परिजन भूमिगत हो गए थे। शनिवार को जब बीडीए की टीम पहुंची तो मकान पर ताला लगा मिला था। रविवार को पुलिस सीलिंग की निगरानी करती रही। मौके पर मिले स्थानीय निवासी ने कहा कि बीडीए ने जब से मानचित्र स्वीकृत न होने की वजह बताकर फरहत का मकान सील किया है, तभी से लोगों को डर सता रहा है। कॉलोनी के 70 फीसदी मकानों के मानचित्र स्वीकृत नहीं हैं तो क्या सभी सील होंगे? यह सवाल लोगों को डरा रहा है।
नौमहला में सील दुकानों पर पुलिस की पहरेदारी
नौमहला मस्जिद के पास शनिवार को सील की गईं चार दुकानों के आसपास पुलिस की पहरेदारी रही। दुकानदारों ने बताया कि वे तो किरायेदार थे। उन्हें हटाने से पहले नोटिस देना चाहिए था। नियम भी यही है। आसपास के दुकानदारों ने बताया कि रोजाना की तुलना में रविवार को ग्राहक कम आए। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों का आवागमन लगा रहा।
जखीरा के लोग बोले, बड़ों के मसले में हम क्या कहें
जखीरा में रविवार को भी बुलडोजर कार्रवाई जारी रही। भारी पुलिस बल तैनात होने की वजह से अधिकतर लोग घरों में ही रहे। जिसे ज्यादा जरूरी काम था, वही निकला। जिस वक्त बुलडोजर गरजा तो कुछ लोग छतों पर आए, लेकिन जब पुलिस ने उन्हें टोका तो लोग पीछे हट गए। आम लोगों ने कहा कि यह मसला बड़ों का है। हम क्या कहें?